1- किसानो के खेत समय से खाली करना होता है और वर्तमान परिदृश्य में खेतों से मिट्टी की लोडिंग जे सी वी से ही सम्भव है , अन्य कोई विकल्प नहीं है ।
2- सरकार को एकमुश्त रू1,70,000= प्रति ईंट Bhatta
एवरेज में विनियमन शुल्क के रूप मे राजस्व अग्रिम रूप से ईंट भट्ठो द्वारा भुगतान किया जाता है , जबकि मिट्टी पर रायल्टी शून्य है । सिद्धांतानुसार कोई देयता नहीं बनतीं है। फिर भी हमारे पदाधिकारियों ने प्रदेश और देश हित मे यह राजस्व देना सहर्ष स्वीकार किया है।
3- किसान को मिट्टी व मिट्टी निकाले जाने वालीं अवधि के एवज का पर्याप्त प्रतिफल भी अग्रिम रूप से दे दिया जाता है और समय से उसके खेत की मिट्टी निकाल कर वापस देना होता है जिससे कि वह बुआई खेती कर सके।
4 – जिस खेत / रकबा से मिट्टी व पलोथन निकाल कर ईंट भट्ठो में लाना होता है,उसका विवरण ईंट Bhatta संचालन आवेदन पत्रक में अंकित रहता है और खनिज विभाग मे जमा किया जाता है ।
5- इसी आवेदन पत्रक की कापी और जमा विनियमन शुल्क चालान कापी ही ईंट भट्ठो के लिए मान्य वैध माइनिंग परमिट होता है। अन्य कोई दूसरे मेमो की आवश्यकता नहीं है। समाधान योजना परिपत्र में निर्देश रहते हैं और व्यवहारिक कठिनाइयों को भी नज़रंदाज नहीं करना चाहिए।
6- महोदय! ईंट भट्टो का सीजनल श्रमिक आधारित काम है जिसके प्रथम चरण मे ईंट पथाईं( कच्ची ईंट ) का काम खुले मैदानों मे होता है। श्रमिकों को अब मिट्टी ख़ुदी ख़ुदाई ढेर के रूप मे देनी होती है क्योंकि मिट्टी टाइट होने के कारण फावड़ा से मिट्टी की ख़ुदाई नहीं हो पाती है और उनकी सुविधा सहजता के लिए मजबूरन j c v से ख़ुदाई गुड़ाई करानी पड़ती हैं।
प्रार्थना
ईंट भट्टो की आवश्यकता को देखते हुए मिट्टी ख़ुदाई भराई परिवहन और भंडारण मे jcv का प्रयोग किए जाने के स्पष्ट निर्देश निर्गत करने की कृपा करे जिससे कि अवैध खनन के नाम पर हमारा उत्पीड़न ना हो और हम अपना काम सम्मानपूर्वक कर सके।
2021-10-12
