भ्रष्ट तंत्र से तंग सिधौल ग्रामसभा के प्रधान अजीत सचान ने गुरुवार को जिलाधिकारी को अपना त्यागपत्र भेज दिया। उनका आरोप है कि ब्लॉक के कर्मचारी और अफसर बिना रिश्वत कोई काम नहीं करते। पात्रों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ देने के बदले पैसों की मांग करते हैं। हर काम का रेट तय है।
डीएम को स्पीड पोस्ट के जरिये भेजे त्यागपत्र में अजीत सचान ने लिखा है कि चुनाव में जनता से रिश्वतखोरी बंद कराने का वादा किया था। कुल वोटों का 80 फीसदी हासिल कर वह प्रधान निर्वाचित हुए थे। अब लोग लगातार उनके पास अपनी समस्याएं लेकर आ रहे हैं, पर वह समाधान नहीं करा पा रहे।
आरोप लगाया है कि चार पहिया वाहन मालिकों के अंत्योदय कार्ड बना दिए गए, जबकि पात्र महीनों से भटक रहे हैं। इसी तरह तमाम कोशिशों के बाद भी वह 60 से 80 वर्ष की उम्र के पात्रों को वृद्धावस्था पेंशन नहीं दिला पाए और दर्जनों अपात्र इसका लाभ उठा रहे हैं। दोनों मामलों में उन्होंने अधिकारियों के सामने साक्ष्य भी रखे, लेकिन कार्रवाई तो दूर, संज्ञान भी नहीं लिया गया।
शादी अनुदान, किसान पेंशन निधि, आवास, कन्या सुमंगला आदि योजनाओं का लाभ पात्रों को दिलवाने के लिए ब्लॉक के अधिकारियों के चक्कर काटे, पर सफलता नहीं मिली। इन मामलों में भी शिकायत की, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अजीत के मुताबिक, ये हालात देख लगता है कि उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
ग्राम प्रधान की कोई भी शिकायत है तो उन्हें लिखित में जानकारी देनी चाहिए थी। हमसे जो भी संभव होगा, वह सहयोग किया जाएगा। प्रधान के त्यागपत्र भेजने की जानकारी अभी तक नहीं है।
अतुल शुक्ला, एडीओ पंचायत, घाटमपुर ब्लॉक
पत्र आने पर प्रधान जी को बुलाकर बात की जाएगी। पूरा मामला समझेंगे। किसी खास अधिकारी के जरिये या किसी खास पटल पर रिश्वतखोरी हो रही है तो उसकी जांच कराएंगे।
विशाख जी, जिलाधिकारी
