कानपुर में दीपोत्सव पर मां काली के पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। शहर में रहने वाले बंगाली समाज के साथ सैकड़ों परिवारों ने गुरुवार को प्रतिवर्ष की तरह दीपोत्सव पर मां काली का पूजन अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना की। चकेरी स्थित श्रीश्री काली बाड़ी मंदिर में भक्तों आरती, पु
ष्पाजंलि और घी के 108 दीए जलाकर दीपोत्सव धूमधाम से मनाया।
मंदिर परिसर में श्रीश्री चकेरी कालीबाड़ी कमेटी द्वारा दीपोत्सव पर विशेष पूजन अर्चन का आयोजन प्रतिवर्ष की तरह किया गया। अयोध्या की तर्ज पर मंदिर को दीपों व झालरों से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर अंजली पूजन किया। दीपावली के दिन बंगाली समाज के भक्तों ने मां करुणायमी का विशेष पूजन दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर किया गया। पूरे दिन मंदिर में भक्तों ने कोविड नियमों का पालन करते हुए दर्शन पूजन किया। मंदिर परिसर में 108 घी के दीपक जलाकर पुष्पांजलि का आयोजन किया गया। मुख्य मंदिर में पूरे विधि-विधान से मां करुणामयी का श्रृंगार पूजन पुजारियों ने बंगाली रीति-रिवाज से किया। भक्तों के मुताबिक दीपावली के दिन तंत्र साधना की देवी मां का स्मरण करने कष्टों का निवारण होता है। कमेटी के संयुक्त सचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बताया कि परंपरा का पालन करते हुए कुमड़े की बलि देने के बाद 108 गुड़हल के पुष्प से मां की विशेष आरती की गई। जिसमें बंगाली समाज के भक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। भोर में मंगल आरती कर बंगाली भजनों पर मां का स्मरण किया गया। मां को 56 प्रकार के पकवान अर्पित कर भोग प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित किया गया। उन्होंने बताया कि मंदिर में बरेली से लाया गया विशेष प्रकार के फाउंटेन भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।
