जिसका कोई नहीं उसके शरीफ़ चचा

अयोध्या के मुहम्मद शरीफ को पद्मश्री से नवाजा गया है। वे अब तक 2500 से ज़्यादा लाशों का अंतिम संस्कार स्वयं के खर्चे से कर चुके हैं। अयोध्या में इन्हें ‘शरीफ चचा’ के नाम से जानते हैं।

जवान बेटे की मौत और फिर लावारिस की तरह अंतिम संस्कार होना शरीफ चचा की संवेदनाओं को अंदर तक झकझोर गया। इसी के बाद शरीफ चचा ने यह संकल्प लिया कि अब अयोध्या की धरती पर किसी भी शव का अंतिम संस्कार लावारिस की तरह नहीं होगा। फिर चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

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