क्यों भड़का बंदियों-कैदियों का गुस्सा, सामने आई फर्रुखाबाद जेल में उपद्रव की खौफनाक वजह
फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जिला जेल में बंदियों-कैदियों के उपद्रव के बाद सामने आया है कि भ्रष्टाचार और दुर्व्यवहार के बीच कैदी की मौत से विद्रोह की चिंगारी भड़क गई। आरोप है कि हर काम के लिए जेल में वसूली होती है और शिकायत पर पिटाई की जाती है ।
फर्रुखाबाद, जेल में अच्छा खाना नहीं…रोज वसूली इसीलिए फर्रुखाबाद जिला जेल में बवाल हुआ। भ्रष्टाचार और दुव्र्यवहार के बीच शनिवार रात बुखार पीडि़त कैदी की मौत ने विद्रोह की चिंगारी और सुलगा दी। अब भले ही उपद्रव का ठीकरा प्रशासन ने बंदियों और कैदियों पर फोड़ दिया है, लेकिन घटना के पीछे की कहानी अलग ही है। उपद्रव के दौरान कैदी-बंदी चिल्ला-चिल्लाकर जेल प्रशासन पर संगीन आरोप भी लगा रहे थे। उनका कहना था कि उन्हें न तो मानक के अनुरूप खाना दिया जाता और न ही बीमारी में ठीक ढंग से इलाज मिलता है। शिकायत करने पर मारपीट की जाती है।
सोमवार को जिला जेल से न्यायालय में पेशी पर आए बंदियों ने आरोप लगाया कि जिला जेल में भ्रष्टाचार चरम पर है। बताया कि रविवार को उपद्रव के बाद पुलिस व जेल कर्मियों ने सभी बंदियों और कैदियों को जमकर पीटा। ऐसा कोई बंदी नहीं, जो घायल न हो। स्वजन ने बताया कि नए जेलर और डिप्टी जेलर के आने के बाद से मिलाई के दौरान दिए जाने वाले सामान पर वसूली के रेट बढ़ा दिए गए हैं।
पैसे नहीं देने पर सामान लौटा दिया जाता था। इससे बड़ी संख्या में बंदी नाराज थे। कुछ ने डिप्टी जेलर पर बुजुर्ग बंदियों संग दुव्र्यवहार का आरोप भी लगाया। बताया कि इसीलिए पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। बुखार आने पर जेल अस्पताल में तीन-तीन दिन तक दवा नहीं दी जाती। कई बंदी डेंगू के शिकार हो गए थे। उन्होंने किसी तरह दवा का इंतजाम कर खुद को ठीक किया। जेल के डाक्टर समय से मरीजों को नहीं देखते, न दवा वितरित की जाती है।
कैंटीन में बढ़ी दरों पर मिलता सामान
बंदियों का आरोप है कि जिला जेल में संचालित कैंटीन में बंदियों को दो से तीन गुणा बढ़ी दर पर सामान मिलता है। हरी मिर्च 30 रुपये की सौ ग्राम, अंडा 20 रुपये में एक, आलू 60 रुपये प्रतिकिलो, सरसों तेल 260 रुपये प्रतिकिलो, दो पूड़ी 10 रुपये, कचौड़ी 10 रुपये प्रत्येक, एक चमचा सब्जी 10 रुपये में मिलती है। गुटखा 10, सिगरेट 15 से 20, बीड़ी बंडल 20 और माचिस पांच रुपये में है। इसी तरह पुराने बंदी अन्य नशे की चीजें महंगी दरों में बेचते हैं। इनमें कुछ अफसर व कर्मी भी शामिल हैं।
-सभी आरोप निराधार हैं। कुछ बंदी अपनी मनमर्जी करना चाहते हैं। नियमानुसार बाहर से आने वाले सामान पर सख्ती की जाती है तो बंदी ऐसे आरोप लगाते हैं। -डा. रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक।
