अहमदाबाद,गुजरात से लगभग 62 किमी की दूरी पर धोलका तहसील में बसा है | यहाँ कोठ गाँव में स्वयंभू गणपति भगवान् का अलौकिक मंदिर है |
लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं और बप्पा के दिव्य दर्शन करके पावन होते है |
मंदिर में गणपति जी की 6 फिट की स्वयंभू प्रतिमा के दर्शन होते हैं | गणेशजी की सूंड बाईं ओर मुड़ी है और प्रतिमा एकदंती व पूर्वाभिमुख है ।
मंदिर का प्रवेश द्वार कलात्मक और आकर्षक लाल पत्थरो में से बनाया गया है | गणपति बप्पा का सिंहाशन सोने से बनाया गया है |सुबह-शाम आरती और पूजा की जाती है |
मंदिर ट्रस्ट द्वारा गणपति बप्पा का प्रिय मोदक प्रसाद के रूप में दिए जाता है |
मान्यता है कि विक्रम संवत 933 अषाढ़ महीने के वद पक्ष के चोथे दिन गणेशजी की प्रतिमा पाव में सोने के पायल ,कान में कुंडल,माथे पे मुकुट ,और समग्र आभूषण के साथ प्रगट हुई थी | प्रतिमा को ले जाने के लिए आसपास के गाँव वालो में झगडा हो गया | उसके बाद चमत्कार हुआ ,प्रतिमा को बैलगाड़ी में रखा गया और वो गाड़ी बिना बैल के अपने आप चलने लगी और गणपतिपूरा के ऊँचे भाग पर जाकर खड़ी हो गयी | तबसे यहाँ का नाम गणपतिपुरा पड गया ,और मन्दिर का निर्माण किया गया |
