निओनेटोलोजी असोसिएशन कानपुर द्वारा मनाये जा रहे नवजात शिशु सप्ताह के अन्तिम दिन

कानपुर l दिनाँक 21 नवम्बर 2021 को केशवपुरम के लाइफट्रोन हॉस्पिटल में एक प्रेसवार्ता का और नर्सिंग स्टाफ प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ जे के गुप्ता, सचिव डॉ आशीष श्रीवास्तव व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ निधि भटनागर ने मीडिया बन्धुओं को और प्रशिक्षु नर्सिंग स्टाफ को सम्बोधित किया। कार्यक्रम में लगभग 50 स्टाफ व माताओं ने भाग किया।
निओनटोलॉजी असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ जे के गुप्ता ने बताया कि असोसिएशन 15 नवम्बर से नवजात शिशु सप्ताह मना रही है और आज इस सप्ताह का अंतिम दिन है। उन्होंने बताया कि भारत मे प्रतिवर्ष लगभग 7.5 नवजात शिशु एक माह की उम्र के भीतर ही मृत्यु का शिकार हो जाते हैं जो कि विश्व मे सर्वाधिक हैं। आज भारत मे नवजात शिशु मृत्युदर 28 प्रति 1000 है, और अपने उत्तर प्रदेश में यह 35 प्रति 1000 है जो कि पहले से तो कम है लेकिन अभी भी चिंताजनक है। तीन चौथाई नवजात की मृत्यु तो जन्म के प्रथम सप्ताह में ही हो जाती है। इस मृत्यु दर का प्रमुख कारण कमदिन और कम वजन के नवजात का होना है जो कि 43% बच्चों में देखने को मिलता है। 19% बच्चों की मृत्यु जटिल प्रसव की वजह से और 16% की मृत्यु इंफेक्शन की वजह से होती है। आज भी देश मे केवल 75% प्रसव अस्पताल में होते हैं जिनमें से अधिकांश बिना नवजातशिशु विशेषज्ञ या ट्रेंड स्टाफ की उपस्थिति के होते हैं। इस हेतु हमारी संस्था नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी) चला कर स्टाफ को ट्रेन्ड करने का कार्य कर रही है। हर पांचवें संक्रमित नवजात की मृत्यु प्रथम सप्ताह में ही हो जाती है। इस हेतु स्टाफ और परिजनों को संक्रमण के प्रति सचेत किया जाना अति आवश्यक है। बिना ठीक से साबुन से हाथ धोये, बिना सैनिटाइजर लगाए और बिना जरूरत के नवजात को नहीं छूना चाहिए।
स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ निधि भटनागर ने बताया कि आज भी केवल एक तिहाई माताएं प्रसव के पहले घण्टे में नवजात शिशु को स्तनपान आरम्भ कर पाती हैं। जिसकी वजह से शिशु में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि केवल 25% माताएं प्रेगनेंसी में नियमित चेकअप करा पाती हैं जिससे प्रसव के समय में जटिलताएं होने का व कम दिन व कम वजन के नवजात होने का खतरा बढ़ जाता है।
सचिव डॉ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि अगर नवजात सुस्त हो, दूध न पिएं, पेशाब कम करे, कराहे, सांस में दिक्कत हो, हाथ पैर में नीलापन हो, पीलिया हो, झटके आएं तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाकर अस्पताल में भर्ती करवाना चाहिए। डेढ़ किलो से कम वजन के नवजात को ठंड से बचाने हेतु कंगारू मदर केयर जरूर दिलवाना चाहिए। नवजात को अच्छी तरह कपड़े पहनाकर रखना चाहिए, उसे छह माह की उम्र तक पूर्ण स्तनपान करवाना चाहिए और टीकाकरण नियमित करवाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष डॉ जे के गुप्ता ने मीडिया बन्धुओं, प्रशिक्षु नर्सिंग स्टाफ व माताओं के हृदय से धन्यवाद दिया।

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