अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कई बार कानपुर का जिक्र किया

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कहना है कि राष्ट्र निर्माण में ग्रामीण, कृषि विकास और ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका है. मेहरबान सिंह पुरवा स्थित चौ. हरमोहन सिंह पैरामेडिकल कॉलेज एवं नर्सिंग इंस्टीट्यूट कैंपस में आयोजित कार्यक्रम में शौर्य चक्र विभूषित चौधरी हरमोहन सिंह यादव को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि चौधरी साहब इस फलसफे को बखूबी समझते थे. इस दौरान राष्ट्रपति ने शिक्षा के विकास पर खास तौर पर जोर देते हुए कहा कि कानपुर में चारों तरफ इसका जाल बिछा है. ऐसे मे कानपुर की जिम्मेदारी भी अहम हो जाती है।
मेहरबान सिंह पुरवा स्थित चौ. हरमोहन सिंह पैरामेडिकल कॉलेज एवं नर्सिंग इंस्टीट्यूट कैंपस चौधरी हरमोहन सिंह यादव के जन्म शताब्दी समारोह में बोलते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य था कि राज्यसभा में हम लोग साथ साथ थे, मैने उन्हें नजदीक से देखा. राष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में हरमोहन सिंह यादव ने जिस शुचिता निष्ठा और ईमानदारी से किया है, ऐसे में उन्होंने यहां आने का निर्णय लिया था. उन्होंने कहा कि कानपुर की बात जब आती है तो परिवार की तरह होती है. अपने सांसद कार्यकाल को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस क्षेत्र का विकास यहां की परंपराओं और अनूकुलता के अनुसार हुआ है. राष्ट्रपति ने कहा कि यहां पर इस परिवार ने शिक्षण संस्थाओं का जाल बिछा दिया है. चौधरी हरमोहन सिंह को याद करते हुए कहा कि वह कहते थे कि विकास का आधार शिक्षा होती है, शिक्षा से ही विकास संभव है. उन्होंने कहा कि चौधरी साहब कहते थे कि ग्रामीण, कृषि विकास और ग्राम पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होने कहा कि राज्यसभा के दौरान हम दोनों ने संसद के कई कार्यकलाप में भाग लिया. उन्होंने कहा कि मेहरबान सिंह का पुरवा तो अब टाउनशिप जैसा विकसित हो चुका है. ऐसे में चौधरी परिवार से अपेक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि समाज से उन्हें जितने सम्मान मिला है, ऐसे में उसे लौटाना भी जरूरी है. ​शिक्षा समेत अन्य कार्यक्रमों में चौधरी परिवार की भागीदारी को और बढाने की उन्होने अपेक्षा की.
कानपुर मेरा अपना, इसकी स्मृति रहेगी अमिट
अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कई बार कानपुर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कानपुर से उनका काफी लगाव है. यहीं पर रहकर उन्होंने शिक्षा ग्रहण की. इसी धरती के आाशीर्वाद से वह देश के प्रथम नागरिक बने. कानपुर और आसपास के लोगों को राष्ट्रपति ने अपने परिवार जैसा बताया.
हमसफर की भावना होने से समाज बढ़ेगा आगे
चौधरी हरमोहन सिंह यादव से जुड़ी स्मृतियों को जीवंत करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि ट्रेन से सफर के दौरान चौधरी साहब अक्सर घर से बना खाना, पकवान और लड्डू आदि लाते थे. वह न केवल हम लोगों को बल्कि उनके आसपास जितने लोग हैं, सभी को वह खाने को देते थे. उन्होने कहा कि चौधरी हरमोहन सिंह यादव कहते थे कि ट्रेन में जितने लोग भी साथ में सफर कर रहे है, वह हमसफर हैं. ऐसे में यह हमसफर की भावना समाज में चरितार्थ हो जाए, तो जाति, बिरादरी, संप्रदाय, उंच नीच के भेद मिट जाएंगे और हम जहां पर रहते हैं, वहीं से स्वर्ग दिखने लगेगा.
आजादी के गुमनाम नायकों का जिक्र भी जरूरी
आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर मनाए जा रहे अमृत महोत्सव का जिक्र करते हुए कहा कि कानपुर का स्वतंत्रता संग्राम से गहरा नाता है. यहां पर नानाराव पेशवा, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन अजीजन बाई, जयदेव कपूर, शिव कुमार वर्मा, विजय कुमार सिंहा, डॉ गया प्रसाद के बारे में भी जानकारी देना जरूरी है. राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी के तमाम ऐसे गुमनाम नायक हैं, जिनके बारे में भावी पीढ़ी को जानना चाहिए।

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