कानपुर नगर l दिनांक 01 दिसम्बर, 2021 को यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ साइंसेस, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा विश्व एड्स दिवस Past, Present & Future of HIV विषय पर स्वास्थ्य जागरूकता व्याख्यान संस्थान के कांफ्रेस हाल में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा0 अनिल कुमार यादव, मुख्य
वक्ता डा0 राहुल मिश्रा, सेकेट्री जनरल, एच.आई.वी. वेलफेयर सोसाइटी आफ इण्डिया, संस्थान के निदेशक, डा0 प्रवीन कटियार तथा हिन्द मेडिकल कालेज में एनाटमी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डा0 आर0के0 श्रीवास्तव द्वारा दीप प्रज्जवलन से हुआ।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा0 अनिल कुमार यादव ने सभी का स्वागत किया तथा उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एच.आई.वी. एड्स के संबंध में जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थी स्वयं जागरूक रहकर इस बीमारी से बच सकते हैं। साथ ही साथ समाज में इस संबंध में जागरूकता बढ़़ा सकते हैं।
मुख्य वक्ता डा0 राहुल मिश्रा, सेकेट्री जनरल, एच.आई.वी. वेलफेयर सोसाइटी आफ इण्डिया ने अपने व्याख्यान में बताया कि पूरे विश्व में विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकडां़े के अनुसार वर्ष 2020 में 3,77,00,000 व्यक्ति एच.आई.वी. संक्रमण के साथ जी रहे हैं। वर्ष 2020 में एच.आई.वी. एवं संबंधित कारणों से 6,80,000 व्यक्तियों की मृत्यु हुयी है। वर्ष 2020 में 15,00,000 नये संक्रमण हुए है। उन्होंने बताया कि इस बार की विश्व एड्स दिवस की थीम है- End Inequalities. End AIDS. भारतवर्ष में एच.आई.वी. संक्रमण के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भारत वर्ष विश्व में एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्तियों के मामले में तीसरे पायदान पर है। भारत वर्ष में 23.5 लाख लोग एच.आई.वी. संक्रमित हैं। प्रति वर्ष 69000 नये संक्रमण होते है तथा लगभग 59000 व्यक्तियों की मृत्यु एच.आई.वी./एड्स से होती है। एच.आई.वी. संक्रमण रोकने के विषय में उन्होंने बताया कि व्यक्ति निम्नलिखित का पालन कर एच.आई.वी. संक्रमण से बच सकते हैं-
1. सुरक्षित यौन व्यवहार। प्रत्येक बार सेक्स करने से पूर्व कण्डोम का प्रयोग ।
(Safe sex practice, using condoms the right way every time the person has sex.)
2. सिरिजेन्स व निडिल को कभी भी शेयर न करना (Never Sharing Needles)
3. संक्रमण से बचने हेतु Pre-exposure Prophylaxis/Post -exposure Prophylaxis का प्रयोग।
उन्होंने बताया कि जिन व्यक्तियों में संक्रमण का खतरा अधिक है वे लोग Pre-Exposure Prophylaxis का प्रयोग कर सकते हैं तथा जो व्यक्ति संक्रमण के संपर्क में आये हैं वे व्यक्ति Post-Exposure Prophylaxis ले सकते हैं। Post-Exposure Prophylaxis केवल आकस्मिक परिस्थितियों में ही लेनी चाहिए और संक्रमण के संपर्क में आने से 72 घण्टों में प्रारंभ कर देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि व्यक्ति एच.आई.वी. पाजिटिव या निगेटिव है इसके लिए जाँच ही एक मात्र माध्यम है। वर्तमान में 03 तरीके के एच.आई.वी. जांचे उपलब्ध है- Nucleic Acid Test (NAT), Antigen, Antibody Test, Antibody Test. एच.आई.वी. के उपचार के संबंध में उन्होंने बताया कि एच.आई.वी. के उपचार के लिए वे दवायें दी जाती हैं जो शरीर में एच.आई.वी. संक्रमण की मात्रा को कम करती हैं। एच.आई.वी. में प्रयोग की जाने वाली दवाओं को Anti-retroviral therapy (ART) कहते हैं। एच.आईवी. को जड़ से समाप्त करने के लिए कोई भी साधन उपलब्ध नहीं हैं लेकिन उचित दवाओं व देखभाल से हम एच.आई.वी. को नियंत्रित कर सकते हैं। अधिकतर व्यक्तियों में दवा लेने के 06 माह के अन्दर एच.आई.वी. वायरस कंट्रोल में आ जाता है।
एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति में क्या कोविड-19 होने का संक्रमण अधिक रहता है? इस पर डा0 राहुल मिश्रा ने बताया कि हम यह मान कर चल रहे हैं एच.आई.वी. संक्रमित वो व्यक्ति जो कि उचित प्रकार से एंटी रेटरोवायरल थिरैपी ले रहे हैं उनमें तथा सामान्य व्यक्तियों में कोविड-19 का खतरा लगभग बराबर है। उन्होंने विद्यार्थियेां को बताया कि हम सभी मिलकर इस बीमारी से लड़ सकते हैं। हमें एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्तियों के प्रति सद्भावनापूर्ण व्यवहार रखना है, उनकी उपेक्षा नहीं करनी है।
विद्यार्थियों ने डा0 राहुल मिश्रा से विभिन्न प्रश्न भी पूछे। बी.एस-सी. एम.एल.टी. द्वितीय वर्ष के छात्र पुनीत ने पूछा कि क्या एच.आई.वी. को गु्रप आफ डिसीज कह सकते हैं? क्या ऐसा हो सकता है कि विण्डो पीरियड के बाद एच.आई.वी. संक्रमण डिटेक्ट न हो। बी.एस-सी. एम.एल.टी. द्वितीय वर्ष के छात्र दिलीप जायसवाल ने पूछा कि क्या टी.बी. व एच.आई.वी. के लक्षण समान हैं एवं एच.आई.वी. की वैक्सीन अभी तक क्यों नहीं आयी? बी.एस-सी. एम.एल.टी. प्रथम वर्ष के छात्र शिवम अग्रवाल ने पूछा कि एच.आई.वी. सीडी-4 सेल्स पर ही क्यों अटैक करता है। संस्थान के योगा शिक्षक डा0 राम किशोर ने पूछा कि इम्यूनिटी व एच.आई.वी. का क्या संबंध है। एम.एस-सी. एम.एल.टी. प्रथम वर्ष के छात्र रूद्र ने पूछा क्या एंटीरेट्ररी वायरल थिरैपी के बाद एच.आईवी. वायरल अनडिटेक्टेबल हो सकता है।
बी.एस-सी. एम.एल.टी. प्रथम वर्ष की छात्रा वर्तिका श्रीवास्तव ने पूछा कि क्या एच.आई.वी. वायरस का म्यूटेशन रूक सकता है? व क्या मच्छर काटने से एच.आई.वी. फैलता है?
उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर देते हुए डा0 राहुल मिश्रा ने बताया कि एच.आई.वी. संक्रमण में CD4 Cells Count कम हो जाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और शरीर में अन्य बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है, जब एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति में बहुत सी बीमारियां हो जाती है तो उसको AIDS (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) कहते हैं। 4 से 6 हफ्तों के समय मंे एच.आई.वी. संक्रमण पता लग जाता है। उन्होंने बताया कि एच.आई.वी. वायरस में म्यूटेशन होने के करण वैक्सीन बनने में देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि मच्छर काटने से एच.आई.वी. संक्रमण नहंीं फैलता है तथा प्रभावी ए.आर.टी. थिरैपी से एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति में एच.आई.वी. वायरस अनडिटेक्टेबल हो सकता है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा0 अनिल कुमार यादव एवं संस्थान के निदेशक डा0 प्रवीन कटियार ने मुख्य वक्ता डा0 राहुल मिश्रा को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के निदेशक डा0 प्रवीन कटियार ने किया।
कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ साइसंेस के शिक्षक श्री चन्द्रशेखर कुमार, श्रीमती नेहा शुक्ला, डा0 के0के0 पाण्डेय, श्री आदर्श श्रीवास्तव, कु0 आकांक्षा बाजपेयी, सुश्री अमीना जैदी, डा0 अनामिका दीक्षित, प्रो0 आर0के0 श्रीवास्तव, डॉ0 राम किशोर, सह मीडिया प्रभारी डॉ0 विवेक सिंह सचान एवं अन्य शिक्षकगण तथा संस्थान के विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी उपस्थित थे।
2021-12-01
