संदिग्ध हालत में कबाड़ गोदामों में आग,18 झोपड़ियां भी जलीं, नौबस्ता के मछरिया में संदिग्ध हालत में कबाड़ के गोदाम में आग लगने से हुआ भारी नुकसान।

कानपुर में नौबस्ता के मछरिया में संदिग्ध हालत में कबाड़ के गोदाम में आग लग गई। आग की लपटों ने पड़ोस के दो अन्य गोदामों और उनसे सटी करीब 18 झोपड़ियों को भी जद में ले लिया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस पहुंची। पुलिस पास में चल रहे मेले में मौजूद लोगों की मदद से बस्ती की अन्य झोपड़ियां खाली कराई। करीब एक घंटे बाद पहुंची दमकल की तीन गाड़ियों ने एक घंटे बाद आग पर काबू पाया।

नौबस्ता के राजीव नगर में अरुण कुमार की जमीन पर छोटे गुप्ता, सचिन, शारिख शेख और मोहम्मद हाजी का कबाड़ गोदाम हैं। इसी गोदाम से सटी हुई करीब 40 से 50 झोपड़ियों वाली बस्ती हैं। इस बस्ती में असम के बरबटा निवासी परिवार रहते हैं और कबाड़ बीनने का काम करते हैं। शनिवार की रात करीब 10 बजे छोटे गुप्ता के कबाड़ के गोदाम में आग लग गई। प्लास्टिक का सामान होने के चलते आग ने कुछ ही मिनटों में टट्टर और टिनशेड वाले गोदाम में चपेट में ले लिया। ऊंची लपटें उठती देखकर बस्ती में दहशत का माहौल हो गया। तेजी से बढ़ी लपटों ने पड़ोसी शारिख और मोहम्मद हाजी के गोदाम को भी जद में ले लिया। विकराल हुई आग की लपटों ने गोदाम से सटी झोड़ियां भी चपेट में आग गई। वहीं कांच की बोतलों में गैस बनने के बाद तेज आवाज के साथ कुछ-कुछ देर में फटने से लोगों में दहशत थी। आग की लपटों ने बस्ती में रहने वाले मुनरा बेगम, फूल माला, रेविना परवीन, सफदर अली, अब्दुल सुबूर, मोउदुल, नूर हुसैन, रुखसाना, समशुल आलम, मोनिरुल, सुरजू, रुकसान अली समेत करीब 18 लोगों की गृहस्थियां चपेट में आने से जलकर राख हो गई। इलाकाई लोगों ने 10:20 बजे आग की सूचना दी थी। फजलगंज फायर स्टेशन से दमकल की पहली गाड़ी 11:30 बजे पहुंची। इसके बाद लाटूश रोड और मीरपुर से भी एक-एक दमकल की गाड़ी घटनास्थल पहुंची। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दमकल जवानों ने आग पर काबू पाया। देर रात तक आग बुझाने का काम जारी था। थाना प्रभारी अमित कुमार भड़ाना ने बताया कि आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं है। हवा का रुख न बदलता तो अन्य झोपड़ियां भी चपेट में आ जाती।

मजार में चल रहे उर्स की भीड़ हुई मददगार

घटनास्थल से कुछ दूर ही एक मजार पर उर्स चल रहा था। जहां भीड़ जमा थी। आग की लपटें देखकर उर्स में मौजूद लोगों की भीड़ आनन-फानन में बाल्टियां लेकर पहुंची थी। प्रारंभिक स्तर पर कुछ लोगों ने बची झोपड़ियों से गृहस्थी का सामान निकालना शुरू कर दिया तो किसी ने आग बुझाने में मदद की।

खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर

झोपड़ियां जलने से करीब 18 परिवारों के सिर से छत छिन गई। गृहस्थियां जलने के बाद अब इन परिवारों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर हैं। मामले की जानकारी होने पर आसपास के पक्के मकान वाले लोगों ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।

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