किरायेदार से ज्यादा की हैसियत नहीं रखते वक्फ के फर्जी मुतवल्ली भी

कानपुर। हरबंसमोहाल थानाक्षेत्र के सुतरखाना में वक्फ की जमीन पर फर्जी और गैरकानूनी ढंग से काबिज मुतवल्ली मो. दिलशाद उर्फ गोपू सहित मुनक्का दलाल जैसे उसके गुर्गों की खुद की इस वक्फ प्रॉपर्टी में एक किरायेदार से ज्यादा की हैसियत नहीं है। फर्जी मुतवल्ली दिलशाद के पिता स्व. इरशाद भी सुतरखाना वक्फ में केवल एक सौ रूपये के किरायेदार थे। आज भी उनके नाम से सुतरखाना वक्फ की 100 रूपये की रसीद कटती है। पुरानी रसीदें दिखाते हुये ये बात बताई एडवोकेट अशफाक गनी खान ने, जो सुतरखाना वक्फ की असली और जायज मुतवल्ली अकीला जमाल के पति हैं। बता दें कि सुतरखाना की कीमती वक्फ प्रॉपर्टी की असल मुतवल्ली अकीला जमाल और उनके वकील पति अशफाक गनी खाना सुन्नी वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल, लखनऊ से लेकर हाईकोर्ट तक में उनकी वक्फ प्रॉपर्टी पर मुतवल्ली के तौर पर काबिज उन्हीं के दूर के रिश्तेदार दिलशाद उर्फ गोपू के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इस सिलसिले में एडवोकेट अशफाक गनी खान बताते हैं कि सुतरखाना वक्फ एक अलल औलाद वक्फ है और इसके नियमों के अनुसार मुतवल्ली सहित सभी मेंबरान को भी वक्फ की जमीनों के किरायेदार के तौर पर रहना होगा। मुतवल्ली भी किराये की रसीद कटवायेगा। जिससे कि वक्फ के भवनों पर जमीनों पर हाउस व वाॅटर टैक्स जैसे खर्चों को चुकाया जा सके। उन्होंने बताया कि दलाल मुनक्का जैसे गुंडों के सहयोग से, और वक्फ बोर्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार की दम पर खुद को मुतवल्ली नियुक्त करवा लेने वाला मो. दिलशाद उर्फ गोपू खुद भी नियमानुसार इस वक्फ का एक किरायेदार ही है। उसके पिता इरशाद द्वारा जमा किये जाते रहे 100 रूपये किराये की रसीदें उनके पास मौजूद हैं। वक्फ के मुतवल्ली समेत सभी किरायेदारों की रसीद सलाना रिटर्न के साथ वक्फ बोर्ड में बाकायदा दाखिल की जाती हैं। जिनका आॅडिट करवाये जाने का भी सख्त नियम है। अकीला जमाल के अनुसार लंबे समय से खाली चल रहे वक्फ ट्रिब्यूनल में जजों की नियुक्ति हो गई है। जल्द सुनवाई शुरू होगी, फिर वो उनके पुरखों के वक्फ पर काबिज फर्जी मुतवल्ली को बाहर का रास्ता दिखायेंगी।

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