विक्रम कोठारी का मंगलवार को निधन हो गया

कानपुर। शहर के जाने-माने कारोबारी व तीन हजार करोड़ रुपए के बैंक डिफाल्ट के आरोपी विक्रम कोठारी का मंगलवार को निधन हो गया। बीमारी के चलते कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी। कारोबारी का अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। घर में काम करने वाले नौकरों ने उनके निधन की सूचना सबसे पहले लखनऊ में पत्नी और बेटे को दी। इसके बाद शहर में रहने वाले रिश्तेदारों का घर पर आना शुरू हो गया। उनके निधन की सूचना के बाद उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
रोटोमैक ग्रुप के चेयरमैन तीन हजार करोड़ से ज्यादा के मामले में जेल के अंदर थे। बीमारी के कारण अदालत ने उन्हें जमानत दी थी। वह तिलक नगर स्थित अपने बंगले में डॉक्टर से इलाज करवा रहे थे। पिछले दिनों वह फिसल कर सिर के बल गिर गए थे। उनका इलाज कानपुर के नामी फिजीशियन कर रहे थे। यहां हालत में सुधार न होने पर उन्हें अपोलो अस्पताल रेफर किया गया था। वहां से टीक होने के बाद वह कानपुर लौट आए थे और पत्नी साधना और बेटे के साथ तिलक नगर स्थित बंगले में रह रहे थे।
मंगलवार को वह घर में अकेले थे और पत्नी लखनऊ गई हुई थीं। सुबह नौकरों ने उन्हें अचेत पाया और डॉक्टर को बुलवाया। इससे पहले उनका निधन हो गया। बताया गया है कि बीते मार्च माह में ब्रेन हैमरेज होने पर भी उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कानपुर से एयर एंबुलेंस से उन्हें लखनऊ शिफ्ट किया गया था, जहां अपोलो अस्पताल में उन्हें आईसीयू में रखा गया था।
पान मसाला का कारोबार करने वाले विक्रम कोठारी ने रोटेमैक पेन लांच करके कंपनी की शुरुआत की थी। 1999 में पारिवारिक बंटवारे के बाद पान पराग से अलग हुए थे। वर्ष 1997 में प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्यातक के रूप के अवार्ड से नवाजा गया था। उन्होंने रोटोमैक कंपनी 1995 में शुरू की थी और अगले 10 वर्ष में कंपनी 100 करोड़ की हो गई थी। विक्रम कोठारी इसे 20000 करोड़ की कंपनी बनाना चाहते थे। इसी के चलते उन्होंने बैंक से कर्जा लिया हुआ था।
पिछले साल 20 मार्च को सीरियस फ्राड इन्वेस्टिगेशन आफिस (एसएफआईओ) की टीम ने रोटोमैक के निदेशक राहुल कोठारी को गिरफ्तार किया था। विक्रम कोठारी का संकटकाल 20 फरवरी 2018 को शुरू हुआ, जब सीबीआई ने छापे मारकर उन्हें और उनके बेटे को गिरफ्तार किया था। कोठारी के बेटे राहुल फिलहाल जेल में हैं। गुर्दे में इन्फेक्शन के कारण उन्हें जेल से उर्सला में भर्ती किया गया था। इलाज के बाद उन्हें पुनः जेल भेज दिया गया।

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