बड़ा मुद्दा : यूपी रोडवेज बस के माथे पर नहीं चित्रकूट का नाम, डिपो से अछूता है ये धाम
Wed, 12 Jan 2022
चित्रकूट की तपोभूमि पर भले बाहर से आने वाली बसों को ठहराव व यात्रियों को सुविधाओं के लिए भाजपा सरकार में बस अड्डा चालू हो गया है लेकिन रोडवेज बसों पर चित्रकूट डिपो का नाम देखने की आस अधूरी ही है। चित्रकूट धाम के जिला बनने के 24 वर्षों बाद भी बस डिपो का प्रयास पूरा नहीं हो सका है। धर्मनगरी के नाम का डिपो और खुद के बसों के बेड़े से श्रद्धालुओं को जो बड़ी राहत मिलती तो गैर राज्यों तक जाने वाली रोडवेज बसों के ऊपर चित्रकूट डिपो का नाम धर्मनगरी का नाम और चमकता। तपोभूमि पर अधूरे बस डिपो के ‘तप’ पर हेमराज कश्यप की रिपोर्ट…।
सैलानियों का दर्द
झांसी से चित्रकूट घूमने आए राजेंद्र तिवारी रोडवेज बस अड्डे पर परिवार के साथ बस के इंतजार में खड़े हैं। चित्रकूट में आए परिवर्तन के बारे में प्रश्न करने बोले, यहां योगी सरकार ने विकास तो खूब किया है। सड़कें अच्छी बन गई है, रामघाट भी चमक रहा है लेकिन, बसों को टोटा है। परिवार के साथ इतनी देर से खड़ा हूं बस के लिए। कोई बाहर की बस आती भी है तो पहले से यात्री इतने हैं कि बैठने की जगह नहीं। कोई थोड़ी खाली बस मिल जाए, तो काम बने। यदि चित्रकूट डिपो बन गया होता तो यूं घंटों खड़े नहीं रहना पड़ता। यहीं से भी डिपो की बसें चलतीं तो ज्यादा सुविधा होती। अकेले राजेंद्र तिवारी ही नहीं, उनके जैसे कई यात्रियों के सामने ऐसी ही परेशानी खड़ी हो जाती है, जो बाहर से आते हैं।
आस्था की भीड़ से खिल उठती धर्मनगरी
धार्मिक आस्था के केंद्र और भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में बारहों मास न जाने कितने श्रद्धालु राममय होने यहां आते हैं। प्रदेश के कई जिलों के साथ ही पड़ोसी मध्य प्रदेश और पंजाब समेत अन्य राज्यों की बसों का आवागमन होता रहता है। मेले या पर्वों पर इन बसों से उतरने वाली भीड़ से धर्मनगरी आस्था व उल्लास से खिल जाती है। इस उल्लास के बीच किसी कोने में मायूसी बस एक बात की नजर आती है, इस जिले का कोई अपना बस डिपो न होना। धर्मनगरी के नाम की पताका बनकर हर दिशा में चित्रकूट डिपो की बसें हर दिशा में दौड़ें, जिला बनने के 24 साल बाद भी यह सपना अब भी सपना ही है। हां, यहां कुछ राहत जरूर पिछले साल जुलाई में मिली, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां 20 करोड़ रुपये से निर्मित सुविधाओं से युक्त बस अड्डे का वर्चुअल उद्घाटन कर इसको शुरू कराया। हालांकि, इतने भर से दुश्वारियों का अंत न हो सका, जो संभव हो पाता सात करोड़ रुपये के बजट के इंतजार में लटके बस डिपो के भी निर्माण के बाद।
बस अड्डा खूबसूरत पर खटकती है डिपो की कमी
बांदा से आए राम किशोर कहते हैं कि चित्रकूट का बस अड्डा तो काफी खूबसूरत बना है। अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं लेकिन, यहां डिपो की कमी खटकती है। बाहर से आने वाली बसों में खड़े -खड़े सफर करना पड़ता है। स्थानीय अरुण कुमार गुप्ता कहते हैं कि चित्रकूट डिपो बहुत जरूरी है। यहां पर प्रति माह विशाल अमावस्या मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं जो घर लौटने के लिए बसों के लिए भटकते रहे हैं। भीड़ में तमाम लोग खड़े जाते हैं। चित्रकूट दशकों से परिवहन डिपो के लिए तरस रहा है। जिला बनने के बाद 24 साल बाद रोडवेड बस अड्डा तो मिल गया, लेकिन डिपो का निर्माण अभी तक नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बस अड्डा का वर्चुअल उद्घाटन किया था तो उम्मीद बंधी थी कि डिपो का कार्य भी विधानसभा चुनाव के पहले हो जाएगा लेकिन लोगों की आस एक बार फिर नई सरकार पर टिक गई है।
2007 से शुरू हुआ था प्रयास
चित्रकूट जिला छह मई 1997 को बांदा जिले से काट कर बनाया गया था। वर्ष 2007-08 में परिवहन विभाग ने डिपो बनाने के जिला प्रशासन से भूमि मांगी थी। प्रशासन ने तत्काल सीतापुर कस्बे के नजदीक बेडी पुलिया मार्ग में 8.70 एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर परिवहन निगम को दी, लेकिन मुआवजे को लेकर परिवहन विभाग और किसानों में ठन गई। वर्ष 2009-10 में तत्कालीन आरएम अतुल त्रिपाठी ने नापजोख कराकर भूमि पर चित्रकूट डिपो का बोर्ड भी लगवा दिया मगर, कुछ किसान हाईकोर्ट चले गए थे। परिवहन निगम मुकदमा हार गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सपा सरकार ने वर्ष 2016 में अंतरराज्यीय बस अड्डा व डिपो निर्माण की आधारशिला रखी लेकिन, कार्यकाल गुजर गया और जमीन तय नहीं हो पाई। वर्ष 2017 में योगी सरकार ने बेड़ी पुलिया में डिपो और बस अड्डा के लिए जमीन खरीदी। पांच साल में सिर्फ रोडवेज बस अड्डा ही बनकर तैयार हो सका।
सबसे अधिक आमदनी को होगा डिपो
चित्रकूट डिपो मंडल का सबसे अधिक आमदनी वाला होगा। अभी महोबा डिपो अ’छी आमदनी देता है क्योंकि वह मध्य प्रदेश सीमा से लगा है। इसी प्रकार चित्रकूट भी मध्य प्रदेश सीमा से लगा जिला है। यहां प्रत्येक माह अमावस्या मेले में देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु आते हैं। चार-पांच दिन जमावड़ा रहता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु विभिन्न प्रदेशों से भी आते हैं। बस डिपो बनने से चित्रकूट से प्रदेश के सभी प्रमुख स्थानों के साथ दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों में सीधी बस सेवा शुरू होगी। डिपो का इंतजार खत्म हो सकता है यदि सांसद व विधायक जिले में सबसे पहले एआरएम की नियुक्ति कराएं। जब अधिकारी नियुक्त हो जाएगा तो वह खुद मानीटरिंग करेगा।
-डिपो निर्माण का कार्य आवास विकास को कर रहा है। डीजल टैंक के अलावा वर्कशाप बनना है, उसके लिए बजट का इंतजार है। -परमानंद, एआरएम रोडवेज डिपो बांदा
