कोरोना की तीसरी लहर तेज़ी से शहर में फैल रही

कानपुर । कोरोना की तीसरी लहर तेज़ी से शहर में फैल रही है । उस के बावजूद शहर में चुनावी पारा तेज़ी से चढ़ रहा है । हालांकि अभी किसी भी पार्टी ने अपने प्रत्यशी घोषित नही किये हैं उस के बावजूद प्रत्याशिता की दौड़ में ताल ठोक चुके अघोषित प्रत्याशी शहर में भागम दौड़ मचाएं हुए हैं । राजनीति पार्टी से दावेदारी ठोकने वाले छोटे , बड़े नेता अपना टिकट पक्का बता शहर में प्रचार प्रसार में लगे हुए हैं तो कुछ नेता अपनी राजनीति ज़मीन ढूंढने में दल बदलू नीति के तहत अपनी गोटियां फिट करने में लगे हुए हैं । ऐसी ही राजनीति की गर्मी शहर की 213 सीसामऊ विधान सभा मे बड़ी हुई चल रही है ये सीट वर्तमान में शहर की हॉट सीट होने वाली है । छात्र राजनीति से राजनीति की शुरूआत करने अपराध की दुनिया मे अपना नाम दर्ज कराने वाले (वर्तमान में कोई अपराध नही)
सपा से वार्ड 109 के दो बार के पार्षद हाजी सुहैल भी अपनी राजनीति ज़मीन को ढूंढते हुए साइकिल को छोड़ कर टिकट के आश्वासन पर पंजे को पकड़ा है । सपा से 3 बार के विधायक इरफान सोलंकी और सुहैल का किसी समय पर अच्छा याराना था सूत्रों के अनुसार साथ मे प्रॉपर्टी के लेनदेन में हुए विवाद में ये याराना दुश्मनी में बदल गया । 2017 के विधान सभा चुनाव में इसी विधानसभा से हाजी सुहैल ने इरफान के खिलाफ आज़ाद उम्मीदवार से पर्चा भर कर लम्बा चौड़ा जूलूस निकाल कर अपनी ताकत का प्रदर्शन भी कर दिया था लेकिन शहर के बुद्धजीवियों और तत्कालीन शहर काजी आलम रज़ा नूरी (स्वर्गवास हो चुका)
ने दोनों का समझौता कराते हुए सुहैल से नामंकन वापिस करवा दिया था । जिस के बाद सुहैल ने चुनाव में इरफान की मदद नही की थी 2017 में कांग्रेस और सपा का गठबंधन था उस के बावजूद इरफान ने भाजपा के सुरेश अवस्थी को मात्र 5826 वोटो से ही हरा पाए थे । हाजी सुहैल के साथ अपनी मजबूत टीम के साथ साथ इसी विधानसभा के वर्तमान एवं पूर्व 5 पार्षद अभी से मेहनत करते हुए दिखाई दे रहे हैं वहीं अब इरफान के पास पुरानी टीम के कुछ ही लोग जुड़े हुए हैं उस मे भी कुछ नाराज हो कर उन का साथ छोड़ रहे हैं जिस का उदाहरण सीसामऊ विधान सभा के अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद फरहान लारी हैं इन्होंने ने भी इरफान का साथ छोड़ते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया है लेकिन अभी पिक्चर बाकी है अगर हाजी सुहैल को कांग्रेस टिकट देती है तो तो एक बार फिर दल बदल परिवर्तन देखने के साथ कांग्रेस को भीतरघात झेलना पड़ सकता है । जिस का सीधा फायदा भाजपा को होने वाला है ।

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