कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाया गया ” श्री बैकुंठ उत्सव”

कानपुर 13 जनवरी दिन गुरुवार दक्षिण भारतीय 161 वर्ष प्राचीन महाराज प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला में ” श्री बैकुंठ उत्सव ” मनाया गया यह उत्सव प्रतिवर्ष पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णमासी तिथि तक मनाया जाता है ।
प्रथम दिन कोरोना महामारी की गाइडलाइन का पालन करते हुए उत्सव का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक एवं तमिल भाषा में विशेष मंत्रोच्चारण के साथ एकादशी को प्रातः 10:30 बजे ‘बैकुंठ द्वार’ (एक विशेष द्वार) दरवाजा जो कि प्रतिवर्ष एकादशी से पूर्णिमा की तिथि तक खोला जाता है। असंख्य भक्तगण भगवान श्री वैकुंठनाथ ( लक्ष्मी नारायण भगवान ) के भव्य स्वर्ण सिंहासन को कंधे पर रखकर इस बैकुंठ द्वार से बाहर आए साथ में दक्षिण भारत के चार आचार्यों (अलवर) के रजत सिंहासन भी रहे ।
कोरोना महामारी गाइडलाइन का पालन करते हुए यह स्वर्ण सिंहासन शिवाला मंदिर प्रांगण के सभी मंडप में परंपरागत विशेष निर्मित अंग वस्त्र एवं प्रसाद का सामूहिक वितरण हुआ ।
यह महोत्सव आम जनमानस में बड़े पेड़े वाला उत्सव के नाम से नाम से चर्चित है।
उत्तर भारत में वृंदावन के अतिरिक्त भक्ति एवं आस्था का यह स्वरूप केवल कानपुर में इस स्थान (मंदिर) में देखने को मिलता है । आम जनता (भक्तों) ने इस अवसर पर आज दिन भर बैकुंठ द्वार से अंदर आकर और लौटकर अपनी आस्था प्रकट की।

यह विशेष बैकुंठ द्वार अगामी पांच दिन तक खुला रहेगा।
उत्सव मंदिर के युवा प्रबंधक अभिनव नारायण तिवारी एवं अध्यक्ष विजय नारायण तिवारी “मुकुल” के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

यह उत्सव में वृंदावन, गोरखपुर , नैमिषारण एवं अयोध्या आदि से अनेक भक्तों एवं आचार्यों ने भाग लिया ।
मध्यान्ह एकादशी का सार्वजनिक भंडारा संपन्न हुआ जिसमें दही पेड़ा एवं फलहारी प्रसाद ( कूटू आटा की पूड़ी एवं सब्जी ) का उचित दूरी बनाते हुए सामूहिक वितरण हुआ ।
प्रमुख रुप से श्री बद्री नारायण तिवारी, राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय, अनिल कुमार शर्मा, मनोज तिवारी, संजय सिंह , जगेंद्र अवस्थी, गोविंद शुक्ला, मुकुंद मिश्रा, मनोज सिंह सिंगर, कनिष्क पाण्डेय, महेश मिश्रा, अजय कुमार मिश्रा व रंगराज रामानुजदास (गोरखपुर), रघुनंदन रामानुजदास (अयोध्या), नागेंद्र रामानुजदास (प्रयागराज), दुर्गेश रामानुजदास ( सिसवारी), मंदिर व्यास करुणा शंकर रामानुजदास, प्रधान आचार्य पंडित सूरजदीन , आचार्य अश्वनी, आचार्य अर्पित, आचार्य अनुराग आदि रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *