कानपुर। दूसरी बार सत्ता पर काबिज होने की जद्दोजहद में भाजपा कई विधानसभा क्षेत्रों में अपनी रणनीति तैयार कर रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य प्रकरण के बाद जिस तरह भाजपा छोड़ने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है उसे देखते हुए पार्टी ने अपनी रणनीति में खासे परिवर्तन किए हैं। सहयोगी दलों और पार्टी के लिए समर्पित पुराने नेताओं पर अब रणनीतिकारों का ध्यान केंद्रित हुआ है। सहयोगी दलों के नाम पर अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद की पार्टी को जहां इस बार पिछली बार के मुकाबले अधिक सीटें देने का फैसला पार्टी नेतृत्व ने किया जिससे कि इन नेताओं की अपेक्षाओं को पूरा कर गठबंधन को एकजुट रखा जा सके। वहीं दूसरी ओर नेतृत्व ने यह भी तय किया लगता है कि अब पार्टी के लिए समर्पित पुराने नेताओं को एक बार फिर सामने लाकर विधानसभा चुनाव का मैदान मार लिया जाय। शहर की दो सीटें जो पिछली बार भाजपा के हाथ से निकल गई थीं उन पर एक बार फिर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए पार्टी ने उन क्षेत्रों के पुराने अखाड़ेबाजों को मैदान में उतारकर अपने पक्ष में माहौल करने का तय किया है। इसके तहत सीसामऊ विधान सभा क्षेत्र जो कि कई बार से सपा के खाते में जा रहा था यहां से एक बार फिर भाजपा ने अपने पुराने अखाडे़बाजों पर दांव आजमाने का फैसला किया है। इसके तहत मंदिर आंदोलन से निकले तेजतर्रार और जुझारू पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी के नाम पर गहनता से मंथन शुरू हो गया है। नीरज के अलावा इस विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत तीन बार से लगातार पार्षद सत्येंद्र मिश्रा का नाम भी दावेदारी में तेजी से चल रहा है। नीरज चतुर्वेदी मंदिर आंदोलन के समय भाजपा की राजनीति में बहुत तेजी से उभरे थे और उनकी छवि एक जुझारू नेता के रूप में जानी जाती है। मंदिर आंदोलन से जुड़े होने के कारण विधानसभा क्षेत्र के हर हिस्से में युवाओं की एक सक्रिय टीम इनसे जुड़ी रहती है। इसके पहले के चुनाव में भी प्रत्याशी के तौर पर इनके नाम की चर्चा होती रही थी लेकिन भाजपा के एक प्रभावशाली वरिष्ठतम मंत्री से इनकी अच्छी ट्यूनिंग न बन पाने के कारण टिकट की दौड़ में ये पिछड़ जाते रहे। पर इस बार सत्ता की दौड़ में आ रही मुश्किलों को देखते हुए पार्टी ने इनके नाम पर गंभीरता से विचार शुरू किया है। दूसरे उम्मीदवार के रूप में सत्येंद्र मिश्रा का नाम बड़ी तेजी से चल रहा है। सत्येंद्र मिश्रा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत लगातार तीन बार से सभासद हैं। अपनी मिलनसार छवि और आमजनों से लगातार जुड़े रहने के कारण इनकी लोकप्रियता इनकी दावेदारी को मजबूती दे रही है।भाजपा की राजनीति से जुड़े कुछ अन्य लोगों का यह भी कहना है कि भाजपा के थिंकटैंक से जुड़े कई लोग इस बार भी सुरेश अवस्थी को ही मैदान में उतारने के पक्ष में हैं। पिछले चुनाव में भाजपा ने डीएवी कालेज के पूर्व महामंत्री व लंबे समय से भाजपा से जुड़े युवा नेता सुरेश अवस्थी को कई बार से सपा के कब्जे में रहने वाली सीसामऊ सीट से मैदान में उतारा था और श्री अवस्थी जीत दर्ज करते-करते रह गए। उन्हें करीब 5 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। हाईकमान में सुरेश को फिर टिकट देने की पैरवी करने वालों का तर्क है कि पिछले चुनाव में भाजपा के ही दो प्रमुख नेताओं ने श्री अवस्थी के खिलाफ अंदरखाने प्रचार किया था। यह दोनों ही डीएवी कालेज की छात्र राजनीति से जुड़े रहे थे। चुनाव के बाद की गई समीक्षा में भी छात्र राजनीति से जुड़े इन दोनों लोगों के नाम भितरघात करने वालों के रूप में हाईकमान तक पहुंचाए गए थे। इनमें तत्कालीन भाजपा सांसद मुरली मनोहर जोशी के करीबी सभासद का नाम भी शामिल था जिस पर सुरेश को नजीराबाद क्षेत्र के कई इलाकों में बढ़त बनाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस बार भी इस सभासद ने स्वयं को प्रत्याशी का दावेदार बताकर दिल्ली तक अपनी पैरवी शुरू की है। भाजपा के एक बड़े वर्ग का मानना है कि श्री अवस्थी को एक बार फिर मैदान में उतारना भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि पूरे पांच साल भाजपा यहां अपनी सक्रियता बनाए रही।दूसरी ओर वर्तमान की आर्यनगर विधानसभा सीट हमेशा से ही शहर में भाजपा का गढ़ मानी जाती रही। व्यापारी बाहुल्य इस सीट पर भाजपा ने हमेशा ही बढ़त बनाए रखी। लेकिन पिछले चुनाव में युवा और जनता के लिए हमेशा संघर्ष करने वाले अमिताभ वाजपेयी की सपा की प्रत्याशिता भाजपा पर भारी पड़ गई और इस क्षेत्र से भाजपा का वर्चस्व समाप्त होकर यह सीट सपा के अमिताभ वाजपेयी ने अपने खाते में कर ली थी। भाजपा एक बार फिर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए पूरी गंभीरता के साथ प्रत्याशी तय करने पर मंथन कर रही है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस सीट पर दो प्रमुख दावेदार दौड़ में आगे चल रहे हैं जिनमें एक नाम बसपा के कद्दावर मंत्री रहे अनंत मिश्रा अंटू और दूसरा नाम संघ से लगातार जुड़े वरिष्ठ व्यापारी वैश्य नेता रतन गुप्ता का है। भाजपा के अंदरूनी सूत्र यह भी बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से अंटू मिश्रा अपने पुराने संबंधों की बांह पकड़कर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ गुफ्तगू कर रहे हैं। माना यह जा रहा है कि अंटू एक बार फिर भाजपा का दामन थामकर आर्यनगर सीट से चुनाव में उतरने जा रहे हैं। दूसरी ओर व्यापार बाहुल्य इस क्षेत्र में इस बात पर भी विचार चल रहा है इस विधानसभा सीट से एक टिकट वैश्य वर्ग को जरूर दिया जाए। व्यापारी नेता रतन गुप्ता का नाम इसी आधार पर वरीयता में है। रतन गुप्ता संघ की गतिविधियों में लगातार सक्रिय रहते हैं और संघ के वरिष्ठ नेताओं से इनके अच्छे संबंध दावेदारी को मजबूती दे रहे हैं। इसके अलावा रतन गुप्ता एक अकेले ऐसे वैश्य नेता हैं जिन्होंने भाजपा से प्रत्याशिता की दावेदारी की है। ये पक्ष भी उनकी दावेदारी को मजबूती दे रहा है।बहरहाल पिछली बार जीत के स्वाद से चूक गई भाजपा इन दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में अपना परचम लहराने के लिए मंझे-मंझाए राजनीति के पुराने अखाड़ेबाजों पर दांव लगाने जा रही है जिससे इन क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला काफी रोचक होने की उम्मीद है। क्योंकि इन दोनों ही क्षेत्रों में सपा के विधायक काफी मजबूत जनाधार वाले माने जाते हैं। पूरे प्रदेश की तरह यहां भी मुकाबला भाजपा और सपा में होना तय माना जा रहा है। भाजपा से प्रत्याशी चाहे अंटू मिश्रा हों या रतन गुप्ता, अमिताभ वाजपेयी की क्षेत्र पर मजबूत पकड़ मुकाबले को कड़ा और रोचक बनायेगी। दूसरी ओर सीसामऊ विधानसभा एक लंबे समय से सोलंकी परिवार के पास है। वर्तमान विधायक इरफान सोलंकी सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में नीरज चतुर्वेदी या सत्येंद्र मिश्रा दोनों को भारी टक्कर देंगे, यह तय है। चुनाव परिणाम जो भी आयें लेकिन इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की लड़ाई बहुत दिलचस्प होगी।
2022-01-14
