कानपुर। विधानसभा चुनाव 2022 के अब तक हुए सर्वेक्षणों में भले ही राजनैतिक पंडित कांग्रेस को ज्यादा महत्व न दे रहे हों लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा महि
लाओं के मुद्दे को आगे कर व उन्हें 40 फीसदी टिकट का वादा पहले चरण में पूरा करने से कांग्रेसियों में उत्साह है। कांग्रेस का टिकट हासिल करने के लिए दिल्ली स्तर पर जोर आजमाईश चल रही है। अपनों को टिकट दिलाने के लिए कोई दलबदल के हथियार से कांग्रेस हाईकमान पर दबाब बना रहा है तो कोई अपनी वफादारी का हवाला देकर अपनों को टिकट दिलाना चाहता है। राजनीति के इन बड़े अखाड़ेबाजों के दबाब से राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी भी असमंजस में हैं। बड़े व जिम्मेदार अखाड़ेबाजों का अपनों के लिए नाक फंसाने के बाद प्रियंका गांधी ने अपने संपर्क सूत्रों से उन सीटों पर फिर गहराई से अध्ययन कराना शुरू कर दिया है जहां के नाम पहली सूची में नहीं थे और एक-एक सीट से टिकट के लिए अखाड़ेबाजों द्वारा दबाब बनाया जा रहा है।कांग्रेस की राजनीति से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों की मानी जाए तो कानपुर की सीसामऊ सीट से अपने आदमी को टिकट दिलाने के लिए दो बड़े मुस्लिम नेताओं ने नाक फंसा ली है। इनमें एक हैं छावनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक सुहैल अहमद अंसारी और दूसरे हाईकमान स्तर पर कांग्रेस में गहरी पैठ रखने वाले नसीमुद्दीन सिद्दकी। सुहैल अहमद अंसारी ने 2017 केविधानसभा चुनाव में भाजपा के तत्कालीन विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया को हराकर यह सीट कांग्रेस के खाते में डाली थी इसलिए उनका भी कांग्रेस हाईकमान में प्रभाव है और नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने उस समय बसपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन की थी जब प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को राजनीति के समंदर में डूबता जहाज माना जा रहा था। जहां विधायक सुहैल अंसारी प्रदेश के नेताओं में गहरी पैठ रखते हैं वहीं नसीमुद्दीन सिद्दीकी की केंद्रीय नेतृत्व में मजबूत पकड़ होने की बात कही जा रही है। पिछले दिनों घोषित की गई कांग्रेस की पहली प्रत्याशियों की सूची में कानपुर की सीसामऊ सीट से किसी को टिकट नहीं दिया गया। इसके बाद ही इन दोनों नेताओं ने हाईकमान पर दबाब बनाना शुरू किया। विधायक सुहैल अंसारी किसी भी स्थिति में हो कुछ दिन पहले ही सपा छोड़कर कांग्रेस में आने वाले सपा सभासद दल के नेता सुहैल अहमद को सीसामऊ क्षेत्र से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाना चाहते हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि वह राष्ट्रीय महसचिव पूर्व विधायक अजय कपूर को विश्वास में लेकर सुहैल अहमद को इस शर्त में ही पांच सभासदों के साथ कांग्रेस में लाए थे कि सुहैल को सपा विधायक इरफान सोलंकी के खिलाफ सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया जाए ।
दूसरी तरफ हाईकमान में गहरी पैठ रखने वाले वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी हरहालत में इस विधानसभा क्षेत्र से अपने करीबी व पूर्व पार्षद हाजी वसीक को सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का उम्मीदवार बनवाने की जिद पर अड़े हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में हाजी वसीक बहुजन समाजपार्टी के टिकट पर इस क्षेत्र से चुनाव लड़े थे तब उन्हें लगभग 20 हजार वोट मिला था। उस समय यह कहा जाता था कि इस विधानसभा क्षेत्र में बसपा का कोई जनाधार नहीं है। इस बात को ही वसीक की मजबूती बताकर वसीक की टिकट के लिए हाईकमान पर दबाब बनाया है।
कांग्रेस के कुछ धुरंधरों की मानी जाए तो अपने करीबी व प्रभावशाली सभासद हाजी सुहैल अहमद को सीसामऊ से टिकट दिलाने के लिए कैंट क्षेत्र के कांग्रेस विधायक सुहैल अंसारी ने वर्तमान में प्रदेश में चल रही दलबदलने की होड़ को ही अपना हथियार बनाया है। अपने करीबी लोगों के माध्यम से विधायक सुहैल अंसारी ने हाईकमान तक यह संदेश भिजवाया है कि अगर उनकी बात को रखते हुए सुहैल अहमद को सीसामऊ से टिकट न दिया गया तो वह कांग्रेस का टिकट वापस कर सपा में चले जायेंगे और वहीं से टिकट हासिल कर चुनाव लड़ेंगे। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस विधायक पूर्व में भी अपनी पसंद का जिलाध्यक्ष बनवाने के लिए भी इस्तीफा देने को अपना हथियार बनाकर सफलता हासिल कर चुके हैं तब उन्होंने उत्तरी क्षेत्र में अपना जिलाध्यक्ष बनवाया था और दक्षिणी क्षेत्र में पूर्व विधायक अजय कपूर के करीबी शैलेंद्र दीक्षित को, क्योंकि उस समय पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का खेमा सुनीत त्रिपाठी को दक्षिण जिलाध्यक्ष बनवाने में लगभग सफल हो गया था लेकिन पार्टी के गिनेचुने विधायकों में एक सुहैल अंसारी के इस्तीफे की धमकी से घबराकर हाईकमान ने सुनीत त्रिपाठी को नजरअंदाज कर शैलेंद्र दीक्षित को दक्षिण कानपुर का जिलाध्यक्ष बना दिया था। इसी रणनीति पर चलकर इस बार विधायक सुहैल अंसारी ने फिर इस्तीफा देकर सपा में जाने की बात कहते हुए अपने करीबी सुहैल अहमद को टिकट देने की जिद शुरू कर दी है। सीसामऊ के अलावा गोविंदनगर विधानसभा सीट पर भी प्रत्याशी घोषित करना कांग्रेस हाईकमान के लिए आसान नहीं साबित हो रहा है। यहां से भाजपा के सुरेंद्र मैथानी ने उपचुनाव में जीत हासिल की थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से अंबुज शुक्ला को प्रत्याशी बनाया था। तब भाजपा के सत्यदेव पचौरी ने अंबुज शुक्ला को पराजित कर जीत हासिल की थी। लेकिन श्री पचौरी के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सीट खाली होने पर यहां से किसी द्वारा गंभीरता से दावेदारी न करने पर कांग्रेस ने करिश्मा ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाया और दिल्ली यूनिवर्सिटी की राजनीति करने वाले करिश्मा ठाकुर ने करिश्मा कर कांग्रेस को जबर्दस्त लड़ाई में ला दिया था। इस चुनाव के बाद से ही करिश्मा ठाकुर व पूर्व में तीन बार विधायक रहे गोविंदनगर क्षेत्र के प्रभावशाली अजय कपूर से छत्तीस का आंकड़ा हो गया था। अजय कपूर हरहालत में यह चाहते हैं कि गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से शैलेंद्र दीक्षित कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरें इससे अजय को सीधे राजनैतिक लाभ होने की संभावना कही जा रही है। पहला यह कि वह अपने करीबी को विधानसभा का टिकट दिला लेंगे दूसरा यह कि जिस किदवई नगर विधानसभा क्षेत्र से अजय कपूर को प्रत्याशी बनाया गया है वह ब्राह्मण बाहुल्य इलाका है और इस क्षेत्र में कांग्रेस दक्षिण के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र दीक्षित की तमाम रिश्तेदारियां भी हैं। 2017 के चुनाव में शैलेंद्र दीक्षित का टिकट कटने के चलते शैलेंद्र के इन सभी करीबी लोगों ने भाजपा उम्मीदवार महेश त्रिवेदी का साथ दिया था। अजय कपूर के करीबी लोगों का मानना है कि शैलेंद्र को अगर अजय टिकट दिला लेते हैं तो इसका लाभ उन्हें किदवई नगर क्षेत्र में काफी हद तक मिल सकता है।
कांग्रेस के अपने ही एक पूर्व विधायक के लगातार दबाब बनाने से हाईकमान इन दोनों सीटों को लेकर ऊहापोह की स्थिति में आ गया है और इन दोनों सीटों पर एक बार फिर अपने संपर्क सूत्रों से समीक्षा करानी शुरू कर दी है। इधर गोविंदनगर सीट से टिकट के लिए करिश्मा ठाकुर दिल्ली के अपने संपर्क सूत्रों के जरिए प्रियंका गांधी पर दबाब बनाए हैं।
प्रदेश स्तर पर कांग्रेस के बड़े नामों में शामिल अब्दुल मन्नान ने आज एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। शहर की राजनीति में खासतौर पर अल्पसंख्यक क्षेत्रों में गहरी पैठ रखने वाले अब्दुल मन्नान पूर्व में कई बार कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। आज उन्होंने विधायक हाजी इरफान सोलंकी के समक्ष सपा में शामिल होने की घोषणा की। अल्पसंख्यक क्षेत्रों में इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
2022-01-14
