कानपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा कानपुर से जुड़ी लगभग सभी विधानसभा सीटों में अपने प्रत्याशी घोषित करने के बाद उथल-पुथल शुरू हो गई है। जहां भाजपा संगठन ने कल ही गोविन्दनगर विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले सपा के कई लोगों को पार्टी में शामिल कराकर यहां के विधायक सुरेंद्र मैथानी की राह आसान कर दी वहीं, भाजपा संगठन से ही जुड़े रहे सीसामऊ क्षेत्र के प्रत्याशी सलिल विश्नोई की राह में भाजपा के ही कई वह लोग रोडे़ अटकाने में जुट गए हैं जो इस विधानसभा क्षेत्र से टिकट के लिए दावा कर रहे थे। भाजपा के एक पूर्व विधायक ने तो बाकायदा अपने लोगों से संपर्क कर सलिल के साथ ही आर्यनगर में अपनी टिकट में बाधा बननेे वाले सुरेश अवस्थी के खिलाफ भी माहौल बनाने पर चर्चा कर ली। आने वाले समय में भाजपा के इन तीनों प्रत्याशियों का अपनों से ही लड़ना संकट का कारण भी बन सकता है। हालांकि भितरघात की यह सूचना दिल्ली व लखनऊ में बैठे राजनैतिक आकाओं को देकर इन तीनों प्रमुख प्रत्याशियों ने अभी से यह प्रयास तेज कर दिए हैं कि शुरूआती दौर में ही भितरघातियों से निपटकर अपनी राह को आसान बना लिया जाय।
सीसामऊ, आर्यनगर तथा गोविन्दनगर विधानसभा क्षेत्रों की चर्चा राजनैतिक दृष्टि से इसलिए करनी पड़ रही है क्योंकि इन तीनों क्षेत्रों से भाजपा के उम्मीदवार बनाए गए सलिल विश्नोई, सुरेश अवस्थी तथा सुरेंद्र मैथानी भाजपा के संगठन से जुड़े रहे हैं और तीनों ने ही जब भाजपा प्रदेश की सत्ता में नहीं थी तब भी संगठन तौर पर भाजपा को मजबूत करने में काफी काम किया। इसके चलते संगठन स्तर पर इन तीनों नेताओं की छवि और पकड़ काफी मजबूत बताई जा रही है। गोविन्दनगर क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र मैथानी की संगठन में मजबूत पकड़ होने का आभास भाजपा ने शुरूआत में ही दे दिया था जब अन्य विधानसभा क्षेत्रों में टिकट के लिए मंथन चल रहा था लेकिन हाईकमान ने महाराजपुर के विधायक व कैबिनेट मंत्री सतीश महाना के अलावा सुरेंद्र मैथानी को ही चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी थी। बाकी सभी विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों को इंतजार करने की बात कही गई थी। भाजपा की राजनीति से जुड़े जानकार लोगों की मानी जाए तो उपचुनाव में प्रत्याशी बने सुरेंद्र मैथानी ने उस समय भितरघात करने वाले कई लोगों को विधायक बनने के बाद तो संतुष्ट कर लिया लेकिन टिकट के एक युवा दावेदार अभी भी गोविन्दनगर क्षेत्र से किनारा किये हैं। सीसामऊ क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी सलिल विश्नोई पिछले विधानसभा चुनावों में आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी थे। संगठन में इनकी पैठ भी काफी मजबूत मानी जाती है। इसका संकेत भाजपा हाईकमान ने तब दिया था जब विधायक का चुनाव हारने के बाद भी पार्टी ने श्री विश्नोई को विधान परिषद का सदस्य बनाया साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र बनारस का प्रभारी भी बना दिया था। चुनाव के समय जब रतन गुप्ता, विनोद गुप्ता, रमापति झुनझुनवाला जैसे कई वैश्य नेताओं ने टिकट के लिए दावेदारी की लेकिन वैश्य मतदाताओं को मजबूती से अपने पक्ष में करने के लिए जब भाजपा के सामने वैश्य प्रत्याशी को मैदान में उतारने की बात ज्यादा गंभीर लगी तो पार्टी ने सलिल विश्नोई पर ही विश्वास जताया और उन्हें आर्यनगर क्षेत्र से हटाकर सीसामऊ क्षेत्र से मैदान में उतार दिया। लेकिन भाजपा की राजनीति से जुड़े लोगों की मानी जाए तो सलिल विश्नोई के धुर राजनैतिक विरोधी एक पूर्व विधायक युवा मोर्चा की राजनीति से जुड़े इस क्षेत्र के यह दावेदार रहे एक नेता तथा इस क्षेत्र से दावेदारी कर रहे एक पूर्व पार्षद आदि ने चुनाव के शुरूआती दौर में ही सलिल विश्नोई की राह में रोड़े अटकाने शुरू कर दिये हैं। अपने लोगों से चर्चा कर यह नेता इस प्रयास में लगे हैं कि अगर एक बार और सलिल चुनाव हार जाते हैं तो आगे से इनका दावा कमजोर हो जाएगा और वह अगले चुनाव में मजबूती से टिकट के दावेदार बन सकते हैं। आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी बनाए गए सुरेश अवस्थी भी संगठन में गहरी पैठ रखते हैं। जब भाजपा सत्ता में नहीं थी तब उन्हें भाजपा बुंदेलखंड क्षेत्र का मंत्री बनाया गया और उन्होंने भी संगठन को मजबूती देने में बढ़कर हिस्सा लिया जिसका परिणाम रहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें तीन बार के विधायक इरफान सोलंकी के खिलाफ मैदान में उतारा गया तब भी एक पूर्व विधायक, एक पार्षद तथा छात्र राजनीति से जुडे़ रहे एक प्रमुख भाजपा नेता पर भितरघात करने के आरोप लगे और श्री अवस्थी कुछ वोटों के अंतराल से चुनाव हार गए। लेकिन संगठन स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ बनी रही जिसका परिणाम यह रहा कि इस बार जब आर्यनगर क्षेत्र से भाजपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने का मन बनाया तो शुरूआती दौर में इस विधानसभा क्षेत्र से टिकट का आवेदन न करने के बाद भी श्री अवस्थी से आवेदन लेकर उन्हें आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया। भाजपा की राजनीति से जुड़े भरोसेमंद सूत्रों की मानी जाए तो पिछले चुनाव में भितरघात करने का आरोप झेलने वाले एक पूर्व विधायक ने एक बार फिर सुरेश के खिलाफ अपनी टीम को सक्रिय किया है। कारण यह भी रहा है कि यह पूर्व विधायक भी उस समय से ही आर्यनगर से टिकट हासिल करने की जुगाड़ में लग गए थे जब संगठन स्तर पर यह तय हुआ कि इस बार आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा जाएगा। पूर्व विधायक के विधायकी कार्यकाल में अबकी सीसामऊ व आर्यनगर दोनों ही सीटों का बड़ा क्षेत्र शामिल था।
गोविन्दनगर सीट से भाजपा के उम्मीदवार बनाए गए विधायक सुरेंद्र मैथानी ने पिछले चुनाव में हुई भितरघात के अनुभव को आधार बनाकर शुरूआती दौर में ही अपना होमवर्क भी पूरा करना शुरू कर दिया। कार्यकाल के दौरान अधिकांश भितरघातियों का विश्वास जीतने के बाद इस बार मैथानी ने चुनाव शुरू होते ही अपनी टीम को मजबूत करने के काम में अन्य प्रत्याशियों से बढ़त बना ली है। शुक्रवार को अपने संगठनात्मिक अनुभव का लाभ उठाकर मैथानी ने परिवार विस्तार कार्यक्रम के तहत गोविन्दनगर विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले छह दर्जन से ज्यादा सपा कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल कराकर अपनी टीम को मजबूत करने में काफी हद तक सफलता पाई अब कुछ और दलों के कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल कर भाजपा परिवार विस्तार कार्यक्र्म को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
जानकार लोगों की मानी जाए तो चुनाव के शुरूआती दौर में ही भितरघातियों के सक्रिय होने की जानकारी हाईकमान तक पहुंचा दी गई है। इसके बाद भितरघात करने की रणनीति तैयार कर रहे नेता बैकफुट पर आते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही लखनऊ से दूत भेजकर इन भितरघातियों को समझाने के साथ ही चेतावनी भी दी जा सकती है। इधर भाजपा प्रत्याशियों ने किसी भी स्थिति में जीत हासिल करने के लिए भितरघातियों के करीबी लोगों के दरवाजे पर भी दस्तक देनी शुरू कर दी है ताकि शुरूआती चरण में ही इन भितरघातियों से निपटकर अपनी लड़ाई को प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों पर केंद्रित किया जा सके।
2022-01-22
