पुखरायां में पूर्व भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष अमरेश तिवारी की हत्या के बाद शव को एएलएस सरकारी एंबुलेंस से घर व पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाया गया था। ऐसा नियम न होने के चलते अब विभागीय अधिकारियों ने एंबुलेंस चालक व एमटी से इस मामले में जवाब तलब किया है।
शनिवार को अमरेश तिवारी की हत्या हो गई थी। सीएचसी पुखरायां में लाए गए अमरेश तिवारी को इमरजेंसी चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया था। इस घटना से गुस्साए भाजपा नेता के समर्थकों ने आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हंगामा किया था। समर्थकों के दबाव के चलते पुलिस व प्रशासन के अधिकारी भी घबरा गए थे। अस्पताल में खड़ी सरकारी एएलएस एंबुलेंस के चालक आकाश व एमटी सन्नी सचान पर शव को एंबुलेंस चलने का दबाव बनाया। दबाव के चलते एएलएस एंबुलेंस के चालक व एमटी अमरेश का शव एंबुलेंस में रखकर सीएचसी से पहले घर ले गए थे। बाद में पोस्टमार्टम भेजा गया था। किसी भी शव को एंबुलेंस में रखकर ले जाने का नियम न होने के कारण वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों ने मामले की जांच पड़ताल करते हुए चालक व एमटी से जवाब तलब किया है, जिससे दोनों कर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। कार्रवाई से बचने के लिए सोमवार को एंबुलेंस चालक व एमटी ने सीएचसी अधीक्षक डा.अनूप सचान से मुलाकात कर अपने बचाव के लिए पत्र लिखने का अनुरोध किया, लेकिन अधीक्षक व शनिवार को इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने मदद करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि चालक व एमटी के अनुरोध पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश तिवारी ने एंबुलेंस के एचआर हेड को पत्र भेजकर कर्मियों की गलती न होने व उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई न किए जाने की बात कही है। एएलएस के क्लस्टर लीडर पवन द्विवेदी ने बताया कि एंबुलेंस के चालक व एमटी ने नियम विरुद्ध शव को सीएचसी से पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाकर गलत कार्य किया है। इसलिए इन दोनों से जवाब तलब किया गया है। मामले की जानकारी लखनऊ मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है।
