कानपुर का ऐतिहासिक गंगा मेला वही मां गंगा का आंचल दूषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी
कानपुर
कानपुर जहां एक तरफ समुचित देश में होली का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है वही पूरे उत्तर भारत यूपी के कानपुर शहर में 1 सप्ताह तक होने वाले रंगों के त्यौहार को लोग जमकर मनाते हैं जिस का समापन शहर का एक हिस्सा गंगा मेला के रूप में वर्षों से मनाता आ रहा है शहर में गंगा मेला के दिन सफाई व्यवस्था प्रशासन चौक चौबंद रहता है वही कानपुर के सरसैया घाट पर शहर के प्रतिष्ठित लोग समाज सेवा से जुड़े लोग अपना कैंप लाकर एक दूसरे को गंगा मेला की बधाई देते हैं उसके तत्पश्चात सायंकाल गंगा तट पर भव्य आरती का आयोजन किया जाता जिसमें शहर के राजनेता से लेकर सरकारी सरकारी विभाग के सभी अधिकारी समाजसेवी इस गंगा मेला में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं लेकिन हर वर्ष होने वाले इस गंगा मेला में जमकर लोग जो मां गंगा के तट पर सेल्फी पोस्ट करते हैं और वहीं दूसरी तरफ 1 दिन पहले मां गंगा का आंचल गंदा करते लोग जरा भी नहीं संकोच करते सोचने वाली बात यह है कि गंगा सफाई से जुड़े बड़े-बड़े अभियान सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित है हकीकत कुछ और है क्या यहां हम सबकी जिम्मेदारी नहीं की गंगा मां को दूषित होने से बचाएं जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी को समझे और शहर की जनता इस गंगा मेला को संकल्प ले की गंगा मां को दूषित नहीं होने देंगे क्या ऐसा कभी हो सकेगा या फिर ऐसे ही गंगा मां को भी छलरते रहेंगे। अगर हम सब यहां संकल्प नहीं ले सकते हैं तो ऐसे झूठे त्यौहार मनाने का क्या फायदा जो आने वाली पीढ़ी भी उस पर हँसे।

