उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत से योगी सरकार की वापसी के बाद सबसे बड़ा झटका कानपुर के खाते में आया है. कानपुर से कद्दावर नेत और दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री पद संभाल चुके सतीश महाना का पत्ता इस बार योगी सरकार के मंत्रिमंडल से कट गया है. महाना का मंत्रिमंडल में न होना, न केवल भाजपाइयों को बल्कि विरोधी दलों को भी हजम नहीं हो रहा है. अब इसके पीछे योगी सरकार की क्या रणनीति है, इसका जवाब तो भविष्य में छिपा है लेकिन कानपुर के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है.
बात अगर सतीश महाना की करें तो विधानसभा चुनावों में वह अब तक आठ बार चुनाव जीत चुके हैं. योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में वह औद्योगिक विकास मंत्री रह चुके हैं. इसके पहले वह नगर विकास राज्य मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. भाजपा की स्थानीय राजनीति में महाना का कद काफी बड़ा है. प्रदेश की राजनीति में भी वह महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. इसका पता इसी बात से चलता है कि 2017 के चुनाव की मतगणना के दौरान अचानक सतीश महाना को दिल्ली बुला लिया गया था और उनका नाम अचानक से सीएम पद की रेस में शामिल हो गया था. योगी सरकार में औद्योगिक विकास मंत्री रहते हुए महाना की अगुवाई में न केवल इंवेस्टर्स समिट का बड़ा आयोजन हुआ बल्कि बड़े बड़े उद्योगपति, निवेश के लिए आगे आए. कहा जाता है कि पीएम मोदी और सीएम योगी की गुडबुक में भी महाना का नाम रहता है. इसके बावजूद उनका योगी सरकार 2.0 में मंत्री न बनना कौतहुल का विषय बन गया है.
महाना के मंत्री न बनने के पीछे कई लोग लोकसभा चुनावों की तैयारियों का भी तर्क दे रहे हैं. पर्दे के पीछे से कई भाजपाई कह रहे हैं कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कानपुर से सतीश महाना पर भाजपा दांव खेल सकती है. इसके पीछे उदाहरण देते हुए कहा जाता है कि सत्यदेव पचौरी जब योगी सरकार में मंत्री थे, तब उनका नाम कानपुर नगर से लोकसभा के लिए फाइनल किया गया. मंत्री पद से इस्तीफा देकर पचौरी लोकसभा लड़े और दिल्ली पहुंचे. चूंकि सत्यदेव पचौरी की उम्र अब भाजपा के मानकों को पार चुकी है. ऐसे में चर्चा है कि लोकसभा चुनावों को लेकर हो सकता है कि महाना को इस बार मंत्रिमंडल में न शामिल किया गया हो.
महाना मंत्री क्यों नहीं बने, यह सवाल पूरे शहर में जंगल की आग की तरह फैल गया है. चर्चा है कि योगी सरकार ने जिस तरह से मंत्रिमंडल में जातीय समीकरण साधे हैं, उसमें क्या महाना फिट नहीं बैठ पाए हैं.
कहा जा रहा है कि सतीश महाना को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल न कर, उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है. महाना, विधानसभा के सबसे सीनियर सदस्यों में से एक हैं. संसदीय कार्यप्रणाली को वह बेहतर तरीके से जानते हैं. ऐसे में महाना को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा भी जोरों पर है.
सतीश महाना के अलावा पूर्ववर्ती योगी सरकार में मंत्री रहीं नीलिमा कटियार का भी पत्ता इस बार कट गया है. चर्चा है कि नीलिमा कटियार की परफॉरमेंस की वजह से इस बार उन्हें नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है l
2022-03-25
