कानपुर l पिता क्या है- अपनी ख्वाहिशों को दिल में दबाकर बच्चों की जिद को पूरा करता है पिता, कंधे पर बिठाकर मेला दिखाता है पिता, अंगुली पकड़कर चलना सिखाता है पिता.., ऊपर से कठोर और अंदर से कोमल होता है पिता.., बुढ़ापे की लाठी मानकर बेटे के लिए हर मुसीबत सहता है पिता…। लेकिन, जब वो ही बेटा उसे बेसहारा छोड़ तो उस पिता पर क्या गुजरती होगी, जरा सोचिये…। जी हां, ऐसी ही एक घटना सरसौल में सामने आई, जहां बुधवार को बुखार से तप रहा एक बुजुर्ग पिता लोगों से भोजन और दवाई की भीख मांग रहा था। घटना दिल को झकझोर देने वाली है..।
खून के रिश्ते ही जब बदसलूकी करने लगें तो बुढ़ापे में व्यक्ति खून के आंसू रोने को मजबूर क्यों न हो। जिस बेटे का जीवन संवारने के लिए खून को पसीने की तरह बहा दिया, उसने ही घर से निकल जाने की नसीहत दे डाली।
बुधवार को पीड़ित बुजुर्ग ने सरसौल चौकी में आपबीती सुनाई तो पुलिस वालों की भी आंखें नम हो गईं। पुलिस ने सबसे पहले उन्हें भोजन कराया और दवा खिलाई और फिर उनका अधिकार भी दिलाया।
सरसौल के बड़ागांव निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग बाबूलाल यादव तेज बुखार में तपते और कंपकपाते हुए बुधवार को सरसौल चौकी पहुंचते हैं। दारोगा पवन तिवारी ने कहा दादा बताओ कैसे आना हुआ, तबियत तो ठीक है। बुजुर्ग ने लडख़ड़ाती जुबान से कहा साहब, देखौ हमार बदन छूकर, बुखार से तप रहे हन। तीन दिन से बीमार हन, घरवाले न दवा करा रहे हैं न ही भोजन दे रहे हैं। लडि़कवा कहत है काम के न धाम के निकल जाओ घर से। उनकी बातों को सुनकर दारोगा ने सबसे पहले उन्हें चबूतरे पर बैठाकर पानी पिलाया और भोजन करवाया।
इसके बाद मेडिकल स्टोर से बुखार की दवा मंगवाकर खिलाई। बाद में वृद्ध को घर ले जाकर बेटे शिवकुमार को समझाया। बुजुर्ग की पत्नी शकुंतला से भी कहा कि पति ही परमेश्वर होता है। इनका ध्यान रखो। बेटे-बहू व उनके बच्चों से कहा कि बाबूलाल की खूब सेवा करो। दारोगा पवन तिवारी ने हिदायत भी दी कि अब शिकायत नहीं आनी चाहिए, वरना कार्रवाई होगी।
