इटावा जिले में भरथना कस्बा क्षेत्र के गजनियापुर में गुरुवार को सब्जी व्यापारियों की एक साथ तीन अर्थी उठने पर समूचा गांव फफक पड़ा। काल के क्रूर हाथों से बुजुर्ग माता-पिता का सहारा, पत्नी का जीवन साथी व बच्चों के सपने छिन जाने पर दुखी परिजनों के मार्मिक विलाप से पूरा गांव शोक में डूबा रहा।
मंगलवार को कानपुर देहात के डेरापुर क्षेत्र में नगला बिहारी गांव के नजदीक हुए सड़क हादसे में भरथना क्षेत्र के चार सब्जी व्यापारियों की मौत हो गई थी। जिसमें तीन मृतक गजनियापुर गांव के थे। एक व्यापारी साम्हो गांव का था। मंगलवार को सभी व्यापारी पिकअप में भिंडी लाद कर कानपुर बेचने जा रहे थे।
घटना के बाद बुधवार रात करीब आठ बजे गजनियापुर में श्याम सिंह, शिवकुमार और रामजी के शव पहुंचने पर उनके परिजनों में चीख-पुकार मच गई। दुखी परिजनों को ढांढस बंधाने पूरा गांव उमड़ पड़ा। दूसरी ओर घटना में साम्हो गांव के मेहताब का शव सूर्यास्त से पहले गांव पहुंच गया था।
उसका बुधवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था। उसे उसके पुत्र राजीव ने मुखाग्नि दी थी। करीब 70 घरों वाले गजनिया पुर गांव में शोक संवेदनाओं के सन्नाटे में विलाप की चीखों से प्रत्येक गांववासी रात भर जागते रहे। गुरुवार सुबह होते ही तीनों की अंतिम क्रिया की तैयारी शुरू कर दी गई।
करीब 8 बजे तीन अर्थी उठते ही दुखी परिजनों की चीख-पुकार से पूरा गांव फफक पड़ा। मृतक श्याम सिंह के पुत्र राजेश और शिवकुमार के पुत्र सुधीर ने चिता को मुखाग्नि दी। वहीं रामजीत को समाधि दी गई। गांव के बाहर ही हुई अंतिम क्रिया में गांव सहित आसपास के लोग भी मौजूद रहे।
