#भगवानकृष्णकाप्रियनाम
श्री राधा जी के अपने महल में एक तोता था, राधा रानी रोज उस तोते को हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कहती थी और तोता भी सारा दिन हरे कृष्ण हरे कृष्ण रटते रहता था और सब सखियाँ भी हरे-कृष्ण, हरे-कृष्ण कहा करती थी.
एक दिन राधाजी यमुना किनारे विचर रही थी. सखियाँ दूर झुंड में किकोल कर रही थी. इतने मै उनकी सामने नज़र पड़ी तो क्या देखती है की श्यामसुंदर नारद जी से बतिया रहे है. श्रीजी को क्या सूझी वो छिप कर उनकी बातें सुनने लगीं. नारद जी कह रहे थे कि जहाँ भी मैं जाता हूँ, वहीं पूरे ब्रज में हरे-कृष्ण, हरे-कृष्ण की गूँज सुनाई देती है. ठाकुरजी बोले पर मुझे तो राधे राधे नाम प्रिय है.
इतना सुनते ही राधाजी कि आँखों से अश्रूओं की धार बहने लगी, वो तुरंत अपने महल पर लौट आयीं और अब अपने तोते से हरे कृष्ण की जगह राधे-राधे कहने लगी. तब सखियों ने कहा लोग तुम्हे अभिमानी कहेंगे कि तुम अपने नाम की जय बुलवाना चाहती हो. श्री जी ने कहा कि अगर मेरे प्रियतम को यही नाम पसंद है तो मैं तो यही नाम लूंगी।
अब राधे राधे कहना जब भगवान श्री कृष्ण को प्रिय है तो हम सभी को भी अपने रोजाना बोलचाल मे राधे राधे कहने की आदत बना लेनी चाहिए। इससे हम भी भगवान के प्रिय हो जायेंगे।
🙏💖 जय जय श्री राधे 💖🙏

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