ATS ने जाजमऊ और बेकनगंज से उठाए दो संदिग्ध आतंकवादी, अलकायदा की सक्रियता से हाईअलर्ट पर पुलिस
आतंकी साजिश में एक बार फिर कानपुर का नाम सामने आया है। पहली बार यहां आतंकी संगठन अलकायदा की सक्रियता के सबूत भी मिले हैं। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (यूपी एटीएस) द्वारा लखनऊ में पकड़े गए आतंकवादियों से पूछताछ में सामने आया है कि यहां गिरोह के कई सक्रिय सदस्य मौजूद हैं। इस सूचना के बाद एटीएस की कई टीमों ने कानपुर में डेरा डाल दिया है। बताते हैैं कि एटीएस जाजमऊ और बेकनगंज क्षेत्र से दो संदिग्ध आतंकी हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। महानगर में अलकायदा से संबंध रखने वालों की मौजूदगी सामने आने के बाद पुलिस को हाईअलर्ट पर कर दिया गया है। एहतियातन रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, बाजारों और भीडभाड़ वाले स्थानों में पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि एटीएस की टीमों ने रविवार को लखनऊ में रिंग रोड स्थित बगारिया, जेहटा बरावन कला, दुबग्गा निवासी मिनहाज अहमद व सीतापुर रोड स्थित मोहिबुल्लापुर निवासी मसीरुद्दीन उर्फ मुशीर को गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से प्रेशरकुकर बम, अर्धनिर्मित बम के साथ ही भारी मात्रा में गोला-बारूद मिला है। पूछताछ में पता चला कि ये आतंकी संगठन अलकायदा समॢथत अंसार गजवातुल हिंद के सदस्य हैं। यह भी सामने आया है कि इनके गिरोह के कई सदस्य कानपुर में हैं, जो 15 अगस्त को प्रदेश को दहलाने की साजिश में सहयोगी थे
इस सूचना के बाद यूपी एटीएस की तीन टीमें आननफानन कानपुर भेजी गईं। एटीएस कानपुर और कमिश्नरेट पुलिस के साथ मिलकर इन टीमों ने संदिग्धों की तलाश शुरू की। सूत्रों के मुताबिक टीमों को शुरूआती सफलता भी मिली है। जाजमऊ और बेकनगंज के पेचबाग क्षेत्र से एक-एक युवक को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। हालांंकि एटीएस सूत्र इस पर कुछ बोलने से फिलहाल परहेज कर रहे हैं।
जिस क्षेत्र में पकड़े गए आतंकी, वहीं मारा गया था सैफुल्लाह : एटीएस ने दुबग्गा चौराहे के पास जिस इलाके से अलकायदा आतंकियों को गिरफ्तार किया है, उसी इलाके में स्थित हाजी कालोनी में आतंकी सैफुल्लाह का एनकाउंटर एटीएस ने किया था। सैफुल्लाह कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र स्थित केडीए कालोनी का रहने वाला था और यह घटना मार्च 2017 की है। वह इस्लामिक स्टेट (आइएस) के खुरासान माड्यूल का सदस्य था। उसे कानपुर से ही मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए थे।
बाद में एटीएस ने कानपुर से ही दो संदिग्ध आतंकियों इमरान और फैजल को भी गिरफ्तार किया था। पता चला था कि इनमें से फैजल का भाई दानिश भोपाल ट्रेन हमले से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया। उन्नाव से भी एटीएस ने कई संदिग्ध लोगों को उठाया था। इसके बाद सितंबर 2018 में चकेरी के जाजमऊ अहिरवां स्थित शिवनगर कॉलोनी पकड़े गए हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमरुज्जमां उर्फ कमरुद्दीन उर्फ डॉ. हुरैरा को गिरफ्तार किया था। उस वक्त भी कानपुर में छिपे स्लीपिंग मॉड्यूल्स के बारे में पता चला था। दिसंबर 2019 में डॉक्टर बम भी मुम्बई से भागकर कानपुर छिपने आया था। तब जांच में पता चला था कि कानपुर में आतंकवादियों को संरक्षण देने वालों का लंबा चौड़ा गिरोह है।
लव जिहाद और मतांतरण में भी सामने आई भूमिका : हाल ही हुई घटनाएं चाहे लव जिहाद हों या मतांतरण, बड़ी संख्या में इन दोनों घटनाओं के आरोपितों के संबंध कानपुर से मिले हैं। यहां जूही लालकालोनी से शुरू हुए लव जिहाद के बवाल के बाद ही प्रदेश सरकार को नया कानून लाना पड़ा था जबकि मतांतरण के मामले में सरगना उमर गौतम के कानपुर से संबंध सामने आए थे। कानपुर के कई युवाओं को मतांतरण के जाल में फंसाया गया था।
इनका ये है कहना
लखनऊ में पकड़े गए आतंक वादियों से पूछताछ में कानपुर में भी गिरोह के कई सदस्य छिपे होने की बात सामने आई है। सूचना मिलते ही सबसे पहले भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। इसके अलावा एटीएस के इनपुट पर उन लोगों को पकडऩे की कोशिश की जा रही है, जो यहां छिपे हैं।
