कानपुर। काकोरी काण्ड के शहीद प. रामप्रसाद विस्मिल की जयंती पर क़ौमी एकता सभा चन्द्रशेखर आजाद जन कल्याण समिति द्वारा कमला नेहरू पार्क जवाहर नगर में सर्वेश कुमार पाण्डेय निन्नी की अध्यक्षता में हुई, सभा के पूर्व क्रांतिकारी विस्मिल के चित्र पर निन्नी ने माल्यार्पण किया तथा उपस्थित कार्यकर्ताओ ने भी उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किये। पूर्व पार्षद, सेनानी परिवार विजय नारायन शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ककोरी कांड को अंजाम देकर विस्मिल और उनके साथी क्रान्तिकारियों का बहुमूल्य योगदान बलिदान रहा है और आपसी सामंजस्य, एकता, भाईचारा को बनाये रखना ही अपने अमर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सभा की अध्यक्षता करते हुए समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश कुमार पाण्डेय निन्नी ने कहाकि क्रांतिवीर विस्मिल क्रान्तिकारी दल के वरिष्ठ सक्रिय क्रान्तिकारी थे और उन्हीं के व चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व में ही 9 अगस्त 1925 को काकोरी रेलकांड को अंजाम दिया गया था निन्नी पांडेय ने बताया उनकेे अभिन्न मित्र शहीद अशफाक उल्ला को भी 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जिला जेल में फांसी हुई थी। वहीं विस्मिल और अशफाक उल्ला खां ने दोस्ती और आपसी महोब्बत की जो मिशाल देश को दी है वह देश के लिए जीवन पर्यन्त साम्प्रदायिक एकता और क़ौमी एकता को बनाए रखने में सीमेंट का काम करेगी। उन्होंने कहाकि तमाम एक्सनों के वक्त विस्मिल, अशफाक दोनों ने एक साथ क्रांति को अंजाम दिया एक साथ ही एक थाली में भोजन किया और फांसी का फंदा चूम था। दोनों क्रांतिवीरों के चरणों में नतमस्तक होकर अपने श्रद्धासुमन समर्पित करता हूं।
विस्मिल की जेल में लिखी नज्म-
तलवार खूँ से रंग लो एहसान रह न जाए, विस्मिल के सिर ऊपर एहसान न रह जाए।
मिट गया जब मिटने वाला फिर सलाम आया तो क्या, दिल की बर्बादी के बाद, उनका पयाम आया तो क्या।
अशफाक उल्ला की नज्म-
हम भी उनके जुल्म के बेदाद से, चल दिये सूबे अदम जिंदाने फैजाबाद से।
है आरजू तो यह कुछ आरजू नहीं, रख दे कोई जरा सी खाके वतन कफ़न पर।
सभा का संचालन राकेन्द्र मोहन तिवारी ने किया एवं बी.आर. गुप्ता, नरेश चंद्र शुक्ला, अरविंद शर्मा, रामचंद्र शुक्ला, धीर त्रिवेदी शालिग्राम मिश्रा, अशोक अवस्थी, संदीप दुबे, मनीष मेहता, कमरुद्दीन ,मोहम्मद फारूक, विनोद त्रिपाठी, रंजीत सिंह, मुकेश गुप्ता, दिलीप त्रिवेदी आदि मौजूद थे
