आज दिनांक 18/06/2022 को महाराष्ट्र विधानसभा परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे जी एवं स्त्री आधार केंद्र महाराष्ट्र की झेलम जी की सखी केंद्र के महिला मानवाधिकार रक्षकों, सखी घरेलू कामगार संघ के पदाधिकारी, राष्ट्रीय दलित महिला के लीडर्स, नेशनल अलायंस ऑफ वूमेंस के प्रदेश प्रतिनिधियों आदि सखी केंद्र की टीम के साथ चर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग 55 महिलाएं उपस्थित रहे।
सखी केंद्र की महामंत्री नीलम चतुर्वेदी जी ने महाराष्ट्र की विधानसभा परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे जी का स्वागत करते हुए उनका परिचय का परिचय देते हुए बताया कि हम 27 साल से गहरे दोस्त हैं और हम लोगों ने मिलकर चौथी विश्व महिला सम्मेलन के लिए मिलकर तैयारियां की थी और फिर नेशनल अलायंस ऑफ वुमन राष्ट्रीय स्तर पर बनाया था फिर नीलम गोर्हे जी पॉलिटिक्स में चली गई और तब से लगातार एमएलए ,एमएलसी और 3 वर्षों से अब महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति है और बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए हैं हम चाहते हैं कि महाराष्ट्र की सरकार ने वह कार्य जो बेहतर किए हैं जो अभी उत्तर प्रदेश की सरकार नहीं कर पाई है उसको जरूर यह साझा करें तत्पश्चात टीम के सभी सदस्यों ने अपना अपना परिचय दिया।
नीलम गोर्हे जी ने बताया कि वह समाज में 35 वर्षों से सामाजिक कार्य कर रही हैं। वह इस समय महाराष्ट्र में विधानसभा परिषद में 3 वर्षों से उपसभापति के पद पर नियुक्त हैं। उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान में स्त्री आधार केंद्र एवं सखी केंद्र दोनों सशक्त महिला संगठन है। महिलाओं और बच्चियों को जब भेच दिया जाता है तो सबसे ज्यादा तकलीफ महिलाओं को ही होती है। महिला हिंसा को रोकने के लिए ‘‘बेल बजाओ’’ अभियान चलाया गया, जो कि काफी हद तक महिलाओं के साथ पुरुषों में भी परिवर्तन लाया। जहां कानून की बात आई उसमें उन्होंने बताया कि पीड़ित महिलाओं को न्याय की प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। महाराष्ट्र में महिलाओं के ऊपर हो रहे हिंसा से संबंधित मामलों के उदाहरण देते हुए महिलाओं को सरल और सहज तरीके उनकी सुरक्षा व बचाव के उपाय बताएं।
घरेलू कामगार महिलाओं तथा असंगठित महिला मजदूरों पर हो रहे उत्पीड़न व उनके रोकथाम के उपाय हेतु कानूनी तौर पर उनकी मांगों को रखते हुए राज्य सरकार व केंद्र सरकार को मांग पत्र भेजना चाहिए। जिससे उन्हें उनका हक का अधिकार मिल सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी लड़की का बलात्कार हुआ है तो उसे कोर्ट में पेशी के लिए अकेले न भेज कर उसके साथ एक ग्रुप बनाकर संस्था उसका सपोर्ट करें। जिससे वह खुद को सुरक्षित महसूस करेगी। उन्होंने एक सुझाव दिया कि जिस प्रकार सुरक्षा सेल महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए बना है, उसी प्रकार से उत्तर प्रदेश में ‘‘भरोसा सेल’’ जैसी हेल्पलाइन बनाई जाए, तो उससे गंभीर समस्याओं को लेकर उनके ही घर पर काउंसलिंग की जाए। जिससे कि वह महिला मानसिक तनाव से बाहर निकलकर वह अपनी कानूनी लड़ाई स्वतंत्र रूप से लड़ सके। गंभीर मामलों में पुलिस सेल कार्यभार से मुक्त हो सिर्फ पीड़ित महिला का फॉलोअप कर सके।
महाराष्ट्र की आधार केंद्र संस्था से झेलम जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सखी केंद्र की इतनी सशक्त व जुझारू बहने के बीच बैठकर उन्हें अपनी बात कहना अच्छा लग रहा है। उन्होंने महिलाओं को अपने ऊपर हो रहे हिंसा से अपना बचाव करने के उपाय बताएं कि महिलाओं को पुलिस विभाग में व अन्य अधिकारियों के समक्ष अपनी बातों कैसे प्रस्तुत करें और प्रशिक्षण देना चाहिए, जिससे वह किसी भी विभाग में अपनी समस्या या अपनी बात को प्रभावी रूप से रख सकें। जिससे कि पुलिस कर्मीं उनकी बात समझ कर उनका सहयोग कर उन्हें प्राथमिकता देना शुरू करें।
आगे उन्होंने बताया कि पर्यावरण का दुरुपयोग बड़े स्तर पर हो रहा है, जिससे प्रभाव हमारे जनजीवन पर सीधा असर दिखाई पड़ रहा है। जैसे के वृक्षो की कटाई, जल संचय, वृक्षा रोपण ना करना के कारण आगे आने वाली पीढ़ी के लिए भुखमरी का भी कारण बन सकता है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि आगे आने वाली पीढ़ी को हम जागरूकता प्रेरित करें कि वह किसी भी तरह की पर्यावरण से संबंधित स्रोतों का हनन ना करें, जिससे कि भावी पीढ़ी पर स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव ना पड़े। झेलम जी ने सक्रिय टीम व सखी केंद्र के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आप लोग के कार्य बहुत ही प्रशंसनीय।
अंत मे आये हुए सभी अतिथियो को स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मानित किया गया।
आज के इस कार्यशाला मे मुख्य रूप से पुष्पा तिवारी, प्रभावती, प्राची त्रिपाठी, माया कुरील, माया सिंह, अनुपमा तिवारी, ममता गुप्ता, कंचन शर्मा, किरन तिवारी, मीना प्रताप, अंशिका गुप्ता, ओजस्व साहू की सहभागिता रही।

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