केडीए में हुए 2.15 करोड़ रुपये के डीजल घोटाले

केडीए में हुए 2.15 करोड़ रुपये के डीजल घोटाले में केडीए के पूर्व केयर टेकरों और पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ स्वरूप नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है. तहरीर में दोनों की मिलीभगत होने की बात उस जांच रिपोर्ट के आधार पर कही गई है जो एडीएम आपूर्ति और केडीए के अपर सचिव द्वारा सौंपी गई थी.
केडीए के मौजूदा केयर टेकर द्वारा ही यह रिपोर्ट दिसंबर 2017 से दिसंबर 2019 तक तैनात रहे केयर टेकरों के खिलाफ लिखाई गई है.इसके अलावा दूसरे नंबर पर पेट्रोल पंप मालिक शैलेंद्र अग्रवाल का नाम है जिनका पता मेसर्स इंजीनियरिंग सर्विस स्टेशन अधिकृत विकेता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड बेनाझाबर रोड अंकित किया गया है. केयर टेकरों के नाम और पते नहीं लिखे गए हैं. हालांकि जांच रिपोर्ट में तीन केयर टेकरों की तैनाती सामने आई थी. लिहाजा तीनों ही तफ्तीश के दायरे में हैं. तहरीर में यह भी कहा गया है कि नगर निगम, विकास प्राधिकरण, जलकल कर्मचारी समन्वय संघ के अध्यक्ष बचाऊ सिंह द्वारा एक फरवरी 2021 को की गई शिकायत पर जांच हुई थी. इसकी रिपोर्ट 7 जुलाई 2021 को दी गई. इसमें पुष्टि हुई है कि 2 करोड़ 15 लाख 57 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान ईंधन आपूर्तिकर्ता फर्म (पेट्रोल पंप) को किया गया. पंप संचालक की इसमें भूमिका की भी जांच की गई है. शैलेंद्र अग्रवाल की तरफ से ऐसे कोई ठोस प्रमाण या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए जिससे यह साबित हो सके कि इस प्रकरण में हुए अतिरिक्त भुगतान से वह लाभान्वित नहीं हुए हैं.लिहाजा प्रथमदृष्टया इसे दुरभि संधि (मिलीभगत) मानते हुए एफआईआर कराई गई है. इसमें धोखाधड़ी, साक्ष्यों में हेरफेर करने और साजिश रचने की धाराएं लगी हैं. जांच में यह बात साफ हो गई है कि बिजली होने के बाद भी कागजों पर घंटों जेनरेटर चलता रहा. वह भी तब जबकि छत पर ही 20 केवीए का सोलर पावर प्लांट लगा हुआ है. कभी-कभी तो केडीए दफ्तर खुलने से लेकर बंद होने तक जेनरेटर का खर्च दिखाया गया. अगर केस्को को किए गए बिजली बिलों के भुगतान की फाइल देखें तो ऐसा नहीं लगता कि कभी इतनी ज्यादा कटौती हुई. उसी केयर टेकर के समय में 11 जुलाई 2019 को बिजली के बिल का भुगतान 1.52 करोड़ रुपये का हुआ है. इसी बिल के सापेक्ष डीजल का खर्च देखें तो हर माह लगभग 12.5 लाख रुपये रहा. बता दें कि केडीए में डीजल घोटाला काफी चर्चा में रहा था. लंबी चली जांच के बाद तत्कालीन केयर टेकर रविंद्र प्रकाश, कर्मेंद्र सिंह और असत अली सिद्दीकी के खिलाफ निलंबन की संस्तुति पूर्व उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह द्वारा की गई थी. दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था. पिछले केयर टेकर (अवर अभियंता) के कार्यकाल में यह घपला पकड़ा गया था.

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