कानपुर : बिल्हौर पुलिस प्रशासन ने हजरत बाबा इब्राहिम शहीद नौगजापीर के सालाना उर्स 2022 के मेले पर रोक लगा दी है. सोमवार को इंतजामिया उर्स मेला कमेटी के सदस्यों के साथ मीटिंग कर प्रशासन ने फैसले की जानकारी दे दी. तय कार्यक्रम के तहत यह मेला 21 जून से 23 जून तक लगने वाला था, अब इस अवधि में लोगों को सिर्फ मजार पर दर्शन-पूजन की इजाजत होगी.
कानपुर के बिल्हौर में मंगलवार से हजरत बाबा इब्राहिम शहीद नौगजापीर के सालाना उर्स शुरू हो रहा है. कोरोना काल से पहले तक उर्स के दौरान तीन दिनों का कव्वाली मेला लगता था, जिसमें झूलों के अलावा दुकानें लगाई जाती थीं. कोरोना के प्रकोप कम होने के कारण इस बार उम्मीद जताई जा रही थी कि उर्स पर मेले की रौनक दोबारा लौटेगी. 4 जून 2022 को पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में परमीशन मिलने के बाद मेला कमेटी ने तीन दिवसीय मेले का प्लानिंग शुरू कर दी गई. मगर इस बीच कानपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में हुई पत्थरबाजी की घटना के बाद सख्ती बढ़ा दी. सोमवार को एसडीएम बिल्हौर आकांक्षा गौतम की अध्यक्षता में प्रशासन और मेला कमेटी की बैठक हुई, इसमें बाबा इब्राहिम शहीद नौगजापीर के मजार पर जायरीनों को आने और चादरपोशी की इजाजत तो दी गई मगर मेले के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया.उधर, प्रशासन के फैसले के बाद मेला कमेटी ने नुकसान होने की बात कही है. उर्स इंतजामिया कमेटी का कहना है कि तीन दिवसीय उर्स आयोजन में 21 जून को मिलाद शरीफ और 22 को कव्वाली का मुकाबला होना था. कमेटी की ओर से हिंदुस्तान के मशहूर क़व्वाल अनीश रहीश साबरी दिल्ली और जफ़र साबरी मुंबई जैसे सुप्रसिद्ध कव्वालों को लाखों रुपये का एडवांस दे दिया था. इसके अलावा मेले में दुकान लगाने वालों और झूले लगाने वालों ने अपनी तैयारियां कर ली थीं. अचानक प्रशासन के आदेश बदलने से कमेटी का नुकसान होना तय है.
बिल्हौर के सीओ राजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान हालात और पुलिस फोर्स की कमी देखते हुए मेले की अनुमति नहीं दी गई है. अगर उर्स इंतजामिया कमेटी प्रोग्राम कराना चाहती है तो अगले महीने इसकी मंजूरी दी जा सकती है. बता दें कि कानपुर के प्राचीन दरग़ाह बाबा इब्राहीम शहीद पर कई सौ वर्षों से उर्स का आयोजन होता रहा है. बाबा के मानने वालों में हर धर्म के लोग शामिल हैं ।
2022-06-20
