इटावा कानपुर हाईवे पर दर्दनाक हादसा, कानपुर देहात में प्राइवेट बस में पीछे से टकराया ट्रक, हादसे में 40 श्रमिक घायल
Mon, 20 Jun 2022
कानपुर देहात में इटावा कानपुर हाईवे पर रसधान कस्बे के पास तेज रफ्तार प्राइवेट बस ट्रक में पीछे से टकरा गई। चालक को झपकी आने से यह हादसा हुआ, जिससे बस में सवार महिला पुरुष व बच्चों सहित करीब 40 लोगों को मामूली चोट आने पर पुलिस ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। घटना के दौरान बस में भट्ठा श्रमिक परिवार के 150 लोग सवार थे जो अलीगढ़ के जटारी से वापस नवादा बिहार अपने घर जा रहे थे।
अलीगढ़ के जटारी कस्बा स्थित ईंट भट्टे पर काम करने वाले करीब 150 लोग परिवार के साथ अपने घर नवादा बिहार जा रहे थे। इटावा कानपुर हाईवे पर रसधान कस्बे के समीप चालक को झपकी आ जाने से तेज रफ्तार बस अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। “घटना के बाद बस में चीख पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। हादसे में बस सवार श्रमिक खानपुर थाना हिसवा जिला नवादा निवासी रंजीत राजवंशी, चंदन राजवंशी, पुत्र गोलू राजवंशी घायल हो गए। वहीं थाना राजगिरी जिला नवादा निवासी शिवनंदन, रविसा बेलदारी, थाना शिदला जनपद नवादा निवासी चंपा देवी, सोनी, खानपुर थाना हिसवा जनपद नवादा निवासी काजल, जमालपुर जनपद नवादा निवासी दिनेश, दीपू, सोनम, अकबर पुर जिला नवादा निवासी भानु देवी, बाबूलाल, दीपक, कुलदीप, लक्ष्मण, सीता, गीता, करीना घायल हो गए।
वहीं जमालपुर जनपद नवादा निवासी मिथिलेश, बसंती, अंजलि, सीताराम चौहान, सरस्वती, शिवा, मांझी, सिसमा जिला नवादा निवासी चेतला, मुंशी, रामचंद्र, चंदू सहित करीब 40 लोग को चोंट आई। घायलों को उपचार के लिए पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद कुछ देर में ही सभी को छुट्टी दे दी गई। वहीं ट्रक चालक वाहन समेत चालक मौके से फरार हो गया। थानाध्यक्ष राम गोविंद मिश्रा ने बताया कि दुर्घटना में घायलों को सीएचसी भर्ती कराया गया था।
दोपहर में पेड़ के नीचे ही भूख प्यास से तड़पते रहे श्रमिक-
अस्पताल से उपचार के बाद सभी श्रमिकों को छुट्टी दे गई थी, जिसके बाद पुलिस ने कस्बा स्थित प्राथमिक स्कूल में पेड़ के नीचे सभी को ठहरा दिया। इसके बाद स्थानीय प्रशासन भी सुध लेना भूल गया। श्रमिक परिवारों में शामिल करीब 73 बच्चे व महिलाएं दोपहर में भूख प्यास से तड़पती रहीं। इसके साथ ही पेयजल के लिए भी उन्हें संघर्ष करना पड़ा।
