Tue, 03 Aug 2021
कानपुर देहात में अधिकारियों के गैरजिम्मेदाराना रवैये के चलते कोरोना से मृत पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र लेने के लिए पति पिछले ढाई माह से चक्कर काट रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी उसे एक से दूसरी जगह भेजकर अपना पीछा छुड़ा रहे हैं। मामले में डीएम से शिकायत करने पर भी कोई हल नहीं निकल सका।
मलासा विकासखंड के फत्तेपुर गांव निवासी वेदप्रकाश ने पूर्व में डीएम को शिकायती पत्र देकर बताया था कि कोरोना संक्रमित होने पर नौ मई को वह अपनी पत्नी बसंती को जिला अस्पताल अकबरपुर की इमरजेंसी लाया। वहां पर जांच में कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। जिसके बाद एल-टू अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वह पत्नी को इमरजेंसी के ठीक सामने बने एल-टू अस्पताल ले गया।
वहां करीब 15 मिनट भर्ती रहने के दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉ. मनोज कुमार ने बसंती को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने उसे पत्नी का अंतिम संस्कार कर आने पर मृत्यु प्रमाण पत्र देने को कहा था। जब उसने 29 मई को आवेदन किया तो एल-टू अस्पताल में बसंती का कोई रिकार्ड न होने की बात कहकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने से मना कर दिया गया।
उसने डीएम से नगर पंचायत मूसानगर से ही प्रमाण पत्र जारी कराने का पत्र दिया, लेकिन उस पर भी कोई सुनवाई नहीं की गई। पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र न होने से उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारी पिछले ढाई माह से उसे दफ्तरों के चक्कर लगवाने में जुटे हैं।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बसंती के कोरोना संक्रमित के चलते रेफर होने के दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसके बाद युवक ने पत्नी को एल-टू अस्पताल में ले जाने की बात कही है, लेकिन वहां के रिकार्ड मेें नाम दर्ज नहीं है। जिस कारण मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं जारी किया जा सका है।
– डॉ. राजीव गुप्ता (सीएमएस जिला अस्पताल पुरुष)
युवक पत्नी का डेथ सर्टिफिकेट जारी करने की शिकायत लेकर आया था। सीएमएस को कार्रवाई के लिए कहा गया। मामला पिछले सीएमओ के कार्यकाल का होने के चलते ज्यादा कुछ कह पाना संभव नहीं है। – डॉ. एके सिंह (सीएमओ)
कोरोना से मौत को छिपा तो नहीं रहे अफसर
कानपुर देहात में कोरोना संक्रमित महिला की मौत पर भी डेथ सर्टिफिकेट जारी न करने के पीछे अफसर कहीं मौत की असलियत छिपाने की कोशिश में तो नहीं लगे हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो बसंती के इमरजेेंसी में भर्ती होने से लेकर कोविड जांच पॉजिटिव आने आदि के दस्तावेज तो उपलब्ध हैं, लेकिन बमुश्किल 20 कदम दूर एल-टू अस्पताल मेें कोई भी रिकार्ड न होना अपने आप मेें सवाल खड़े कर रहा। स्वास्थ्य अधिकारियों की माने तो युवक पत्नी को अगर प्राइवेट अस्पताल भी ले गया तो वहां से मौत होने की सूचना क्यों नहीं दी गई।
