दिवाली के बाद अब बारी है छठ पूजा की। जिसको लेकर एक बार फिर से अपने उत्तर मध्य रेलवे विभाग ने बड़ी दावेदारी करते हुए तीन का सफर करने वाले यात्रियों के लिए विशेष सुविधाओं का पुख्ता इंतजामात कर रखा है। लेकिन ये कितनी कारगर साबित होगी इसका कह पाना अभी बेहद मुश्किल होगा। क्योंकि हाल ही में बीते दीपावली के त्योहार पर काफी भीड़ देखन को मिली थी। पर असर कुछ मिला जुला रहा। कुछ इसी जायजा कानपुर रेलवे स्टेशन घंटाघर पर जाकर लिया गया।छठ पूजा को लेकर रेलवे ने कई स्पेशल ट्रेनें चलाई है, लेकिन उसके बावजूद भी यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते कुछ यात्री संतुष्ट नजर आए तो कुछ पहले की तरीके असंतुष्ट वाली बाते बोलते दिखे। वहीं हर बार की तरह इस बार भी रेलवे ने की छठ महापर्व पर स्पेशल ट्रेनों का लंबा खाका हर जगह अपडेट किया हुआ है। लेकिन इसकी जानकारी स्टेशन पर मौजुद्य में जागरूकता को लेकर कम दिखाई दी।इस विषय और अहम जानकारी को लेकर जब कुछ यात्रियों से बातचीत की तो कुछ यात्रियों ने रेलवे के कार्य को लेकर संतुष्टि जाहिर की तो वहीं कुछ यात्रियों ने बताया कि ट्रेनों में इतनी भीड़ है कि चंडीगढ़ से लेकर कानपुर तक फर्श पर लेट कर आना पड़ा हैं। वहीं कुछ यात्रियों का कहना था कि वह टिकट होने के बावजूद भीड़ की अधिकता के चलते घर जाने की होड़ में तीन के दरवाजे में लटक कर अपना सफर तय कर रहे हैं।हालत यह थी कि ट्रेन में पैर रखने की जगह तक नहीं बची थी। जब एक आने वाली ट्रेन को देखा गया तो सब कुछ सामने था। भेड़ बकरियों की तरह लोग एक के ऊपर एक लदे हुए थे। इतना ही नहीं कुछ लोग तो टॉयलेट में भी बैठे नजर आए। नौबत तो यहां तक थी कि यात्री इमरजेंसी खिड़कियों को दरवाजे के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे और अपनी सुरक्षा का भी ख्याल नहीं कर रहे थे।हम भारत के सबसे बड़े सफर तीन यात्रा की करें तो हर एक देश वासी को खुद जागरूक होना पड़ेगा। क्योंकि अक्सर देखा गया है कि अधिकांश लोग अपनी टिकट को बुक और करा तो लेते हैं पर जागरूक व्यक्ति के अलावा अन्य यात्री ये नही देखते हैं कि जिस ट्रेन में वह सफर करने जा रहें हैं उसमे यात्रियों की क्षमता है कि नहीं, बस सफर करना और घर पहुंचना ही उनकी फितरत में अंतिम चारा होता है।इस रियल्टी चेक में एक और बात या उसे हकीकत कहेंगे कि रेलवे विभाग जिस ट्रेन यात्रा की जनरल टिकट यात्रियों की बना रहा होता है उसमे संख्या का भी विशेष ख्याल रखें। क्योंकि यात्री को इस जनरल सुविधा में लगता है कि उसे बैठने की जगह मिल ही जायेगी। पर जब ट्रेन का ठहराव होता है और उसमे यात्री सफर को बैठते हैं तो उनकी संख्या इतनी अधिक हो जाती है कि उन्हें सफर करने की होड़ के चलते इस तरह की परेशानियों का सामना करना एक अनुमान सी बात बन जाती है।
2023-11-17
