रसूलाबाद समाचार

 

 

धान की फसल कटाई के समय किसानों पर पराली जलाने पर कई तरह का जुर्बाना लगाया गया और जुर्बाने की कैटागरी 2500 सौ रूपए से लेकर 15000 हजार तक का जुर्बाना वसूला गया अब गेंहू की फसल आवारा जानवर नष्ट कर रहें है इस पर किसी भी अधिकारी की नजर क्यों नहीं पड़ रही है

अब सोचने वाली बात है कि अधिकारियों पर जुर्बाने का कोई बिकल्प है या फिर दोनों तरह से किसान को ही नुकसान झेलना पड़ेगा यह कैसा अन्याय किसानों साथ किया जा रहा है

 

दिन प्रतिदिन सर्दी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है किसान अपनी खेत की रखवाली करें या अपने शरीर को सर्दी से बचाए किसानों को सभी तरह से परेशान करने के लिए क्या अधिकारियों ने कसम खा रखी है

कई बार भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के पदाधिकारियों ने आवारा जानवरों का ज्ञापन में जिक्र किया लेकिन अधिकारियों के कान में जूँ तक नहीं रेंगी।

 

प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौशालाएं बनाई गई फिर भी आवारा जानवरों से किसान परेशान है। किसान के जिस खेत में लगभग दो दर्जन आवारा जानवर फसल चर लें उस किसान की क्या हालत होगी।

 

जिम्मेदार अधिकारियों का पराली जलाने में जितनी तेजी से सेटेलाइट काम कर था क्या अब आवारा जानवरों के लिए सैटेलाइट कहीं गुम हो गया है। जिम्मेदार अधिकारियों के पास शायद इसका जवाब नहीं है।

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