बेहमई कांड की सुनवाई में बचाव पक्ष ने मांगी केस डायरी की नकल, अभियोजन ने विरोध कर कही यह बात
कानपुर देहात में बेहमई कांड की सुनवाई में बचाव पक्ष ने केस डायरी की नकल मांगी है। अभियोजन पक्ष ने इसे ट्रायल प्रभावित करने वाला कदम बताकर विरोध किया। अब सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की गई है।
सिकंदरा थानाक्षेत्र के बेहमई गांव में 14 फरवरी 1981 को फूलन देवी, मुस्तकीम, राम औतार व लल्लू गैंग में शामिल 35-36 डकैतों ने गांव में डकैती डाली थी। यहां 26 पुरुषों को गांव के बाहर ले जाकर अधाधुंध फायरिंग कर दी गई। इसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय के यहां चल रही है। मामले में आरोपित श्यामबाबू, भीखा व विश्वनाथ न्यायालय में पेश हुए। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने केस डायरी की नकल दिलाने की मांग की, जिसका अभियोजन पक्ष ने विरोध कर तर्क दिया कि वर्ष 1981 में ही पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। साथ ही वर्ष 2012 में गवाहों के बयान व न्यायालय से आरोप भी तय हो गए थे, इसलिए अब केस डायरी की नकल मांगना केस के ट्रायल को प्रभावित करेगा, जिससे केस लंबित होगा। शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि बचाव व अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तिथि नियत की है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष से अधिवक्ता गिरीश नारायण द्विवेदी ने केस डायरी की नकल दिलाने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि केस डायरी की नकल के दिलाने के लिए उनकी ओर से दिया गया प्रार्थना पत्र अब तक लंबित है। केस में 5 सितंबर 2007 को ही आरोप तय हो गए थे। वहीं बचाव पक्ष की ओर से दिए गए तर्क का अभियोजन ने विरोध किया।
