कानपुर विजय इंटरकांटिनेंटल में आयोजित एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी में महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याओं जैसे PCOD और एंडोमेट्रियोसिस पर चर्चा की गई। इस अवसर पर लखनऊ से आईं लखनऊ ओब्स एंड गाइनी सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. सुनीता चंद्रा ने PCOD जैसी गंभीर बीमारी के इलाज पर व्याख्यान दिया।
डॉ. मीरा अग्निहोत्री, पैट्रन ISOPARB सोसाइटी ने बताया कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), जिसे PCOD के नाम से भी जाना जाता है, महिलाओं में बांझपन के प्रमुख कारणों में से एक है। यह हार्मोनल विकार महिलाओं के अंडाशयों को प्रभावित करता है, जिससे अंडे का समय पर विकसित होकर बाहर न आना गर्भधारण में बाधा उत्पन्न करता है। यह समस्या आमतौर पर 15 से 40 वर्ष की आयु में देखी जाती है।
ISOPARB सोसाइटी, कानपुर की प्रेसिडेंट डॉ. नीलम मिश्रा ने PCOS के लक्षणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इसके प्रमुख लक्षणों में अनियमित माहवारी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव, चेहरे, पीठ व छाती पर अनचाहे बालों की वृद्धि, वजन बढ़ना, त्वचा में पिगमेंटेशन, सिरदर्द और मुंहासे शामिल हैं।
डॉ. सुनीता चंद्रा ने बताया कि पीसीओएस के उपचार में पीरियड्स को नियमित करने के लिए बर्थ कंट्रोल पिल्स दी जाती हैं, साथ ही इंसुलिन प्रतिरोध और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण हेतु भी दवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा जीवनशैली में बदलाव और हार्मोनल थेरेपी भी लाभकारी हो सकती है। अधिक वजन होने पर वजन घटाने की सलाह दी जाती है, जिसमें कभी-कभी बेरिएट्रिक सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।
गोष्ठी का संचालन डॉ. किरन सिन्हा और डॉ. विनीता अवस्थी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मीरा अग्निहोत्री और डॉ. नीलम मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किए और इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया
