सिर्फ 2 डोज होम्योपैथिक दवाएं डेंगू जैसे लक्षण वाले बुखार में हैं कारगर
डेंगू की समस्त अवस्थाओं (डेंगू डेंगू शॉक सिंड्रोम, डेंगू हेमोरेजिक फीवर) में अत्यधिक कारगर हैं होम्योपैथिक दवाएं
प्लेटलेट्स के निरंतर कम होने पर हो सकता है डेंगू, तुरंत कराएं होम्योपैथिक उपचार
डेंगू के प्रकोप से बचने में होम्योपैथिक दवाएं कारगर
डेंगू बुखार से डरने एवं भयभीत होने की जरूरत नहीं है क्योंकि होम्योपैथी में ऐसी अनेक दवाइयां हैं जो डेंगू बुखार से बचाव एवं उपचार में पूरी तरह कारगर है यह जानकारी आरोग्यधाम ग्वालटोली के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ हेमंत मोहन ने दी है उन्होंने बताया कि डेंगू बुखार अन्य वायरल बुखार की तरह ही है जो डेंगी वायरस के कारण होता है वायरल जनित बुखार होने के कारण इससे ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है उन्होंने बताया कि *डेंगू बुखार मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है जो रुके हुए साफ पानी में पैदा होता है तथा दिन में काटता है। मच्छर के काटने के 3 से 5 दिनों के अंदर डेंगू बुखार के लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं उन्होंने बताया कि डेंगू बुखार तीन तरह का होता है। साधारण डेंगू बुखार डेंगू हेमोरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम डॉक्टर हेमंत मोहन ने बताया की साधारण डेंगू बुखार में ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार, सिर और मांसपेशियों जोड़ो एवं हड्डियों में तेज दर्द आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना जो आंखों को दबाने या हिलाने से बढ़ जाता है, बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख ना लगना, जी मिचलाना, गले में हल्का दर्द होना, चेहरे गर्दन और छाती पर लाल गुलाबी रंग के रैशेज़ के लक्षण पाए जाते हैं यह बुखार 3 से 7 दिन तक रहता है। *डॉ हेमंत मोहन ने बताया कि डेंगू हेमोरेजिक फीवर में साधारण डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ मसूड़े नाक मल मूत्र में खून का आना, पेट में दर्द तथा त्वचा पर गहरे गहरे नीले काले रंग के छोटे अथवा बड़े रैशेज पड़ जाते हैं। डेंगू शॉक सिंड्रोम में साधारण हेमोरेजिक बुखार के लक्षणों के साथ तेज बुखार के बावजूद त्वचा ठंडी महसूस होती है, और रोगी धीरे-धीरे होश होने लगता है, मरीज की नाडी कभी तेज और कभी धीमी चलने लगती है, उसका ब्लड प्रेशर कम होने लगता है प्लेटलेट कम होने लगते हैं। इस स्थिति में मरीज को चिकित्सालय में भर्ती कराना चाहिए। डॉ आरती ने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए एडीज मच्छरों को पैदा होने से रोकना, काटने से बचाव करना, शरीर विशेषकर पैरों को ढके रहना, पूरे पैरों को ढकने वाले कपड़े पहनना चाहिए। उन्होंने बताया कि केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ अनिल खुराना के अनुसार सभी डेंगू बुखार का उपचार होम्योपैथी द्वारा संभव है। परंतु डेंगू बुखार के उपचार के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित मानक जैसे प्लेटलेट्स चढ़ाने एवं अन्य प्रबंधन को अपनाया जाना चाहिए। डॉक्टर आरती मोहन ने बताया कि डेंगू बुखार से बचाव के लिए ईपेटोरियम परफ 200 शक्ति में 3 दिन तक चिकित्सक की सलाह पर प्रयोग करना चाहिए। डॉ आरती मोहन ने बताया की जेलसीमियम क्रोटेलस, ब्रायोनिया, कैरीका पपाया रस टॉक्स, ईपेटोरियम परफ, हैम्मिलिस, चाइना, फेरम फास, आदि दवाइयों का प्रयोग लक्षणों के आधार पर केवल चिकित्सक की सलाह पर किया जाना चाहिए।
डॉ हेमंत मोहन
डॉक्टर आरती मोहन
आरोग्यधाम ग्वालटोली
94150 50372

