*श्री पद्मावती (अम्मावरी) मन्दिर , तिरुचनूर*

 

आंध्रप्रदेश के तिरूपति शहर से मात्र 5 कि.मी. की दूरी पर तिरुचनूर में स्थित, श्री पद्मावती अम्मावरी मन्दिर , जिसे लोग अल्मेलुमंगापुरम के नाम से भी जानते है जो कि वेंकटेश्वर यानी भगवान विष्णु की पत्नी महाशक्ति माता पद्मावती को समर्पित है।

भगवान वेंकटेश्वर की पत्नी देवी पद्मावती , तिरुमाला की तलहटी में निवास करती हैं। लोगों का मानना ​​है कि तिरुमाला में स्थित भगवान वेंकटेश्वर मन्दिर के दर्शन के बाद देवी पद्मावती के दर्शन करना जरूरी है।

यह मन्दिर दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित मन्दिरों में से एक है जो हर साल हजारों भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

पद्मावती माता रानी बेहद दयालु , जो न सिर्फ अपने भक्तों को आसानी से क्षमा कर देती है बल्कि उनकी हर मनोकामना भी पूरी करती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार , देवी पद्मावती का जन्म , सात पहाड़ियों के राजा , आकाश राजा की बेटी के रूप में हुआ था। कहते है कि देवी पास के शहर पद्मावती क्षेत्र के एक तालाब में कमल के फूल से प्रकट हुई थीं। जब भगवान वेंकटेश्वर शिकार पर थे तब उस देवी से उनकी भेट हुई और उन्हें उनसे प्रेम हो गया। उन दोनों का विवाह एक भव्य समारोह में हुआ , जिसके बारे में माना जाता है कि यह विवाह इसी मन्दिर में हुआ था। आज भी उनकी शादी का जश्न हर साल नवरात्रि उत्सव के दौरान मन्दिर में मनाया जाता है।

पौराणिक कथा यह भी है कि देवी पद्मावती का जन्म कमल के फूल से हुआ है , जो मन्दिर के तालाब में खिला था। इसी मन्दिर के तालाब में खिले कमल के फूल से देवी पद्मावती के रुप में माता लक्ष्मी ने जन्म लिया था , जिन्हे भगवान श्री हरि के वेंकटेश्वर स्वरुप की पत्नी कहा जाता है। माँ लक्ष्मी 12 साल तक पाताल लोक में वास करने के बाद 13वें साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को माता पद्मावती के रुप में धरती पर अवतरित हुई।

श्री पद्मावती अम्मावरी मन्दिर की वास्तुकला द्रविड़ और विजयनगर शैलियों का मिश्रण है।श्री पद्मावती अम्मावरी मन्दिर का गोपुरम (मीनार) 40 फीट ऊॅंचा है जो कि देवी — देवताओं की जटिल नक्काशी से सुसज्जित है। मन्दिर की दीवारें सफेद संगमरमर से बनी हुई हैं जिन्हें नक्काशी और चित्रों से सजाया गया हैं। मन्दिर परिसर में भगवान शिव , हनुमानजी , देवी लक्ष्मी सहित यहाँ कृष्णृ- बलराम , सुदरा वरदराजा स्वामी और सूर्यनारायण का मन्दिर भी काफी महत्वपूर्ण है , किन्तु प्रभु वेंकटेश्वर की पत्नी होने के कारण पद्मावतीदेवी का मन्दिर सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। श्री पद्मावती अम्मावरी देवी का मन्दिर मुख्य मन्दिर है जिसे सोने और कीमती पत्थरों से सजाया गया है।

मन्दिर में पद्मावती देवी की चांदी की विशाल मूर्ति है , जो कमल पुष्प के आसन पर पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं। माता के दोनों हाथों में कमल पुष्प सुशोभित हैं। इनमें से एक फूल अभय का तो दूसरा पुष्प वरदान का प्रतीक है।

पद्मावती अम्मावरी देवी का श्रृंगार भी तिरुपती वेंकटेश्वर स्वामी भगवान की तरह सोने के वस्त्रों व आभूषणों से किया जाता है। मन्दिर के ऊपर एक विशाल ध्वज लहराता रहता है , जिस पर देवी पद्मावती के वाहन एक हाथी की छवि बनी हुई हैं।

इस मन्दिर का इतिहास 8वीं शताब्दी का है जब मन्दिर का निर्माण शुरू में पल्लवों द्वारा किया गया था। बाद में 14वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासनकाल के दौरान मन्दिर का जीर्णोद्धार और व्यापक रुप में किया गया। मन्दिर की वास्तुकला पल्लव , चोल और विजयनगर शैलियों का मिश्रण है।

श्री पद्मावती अम्मावरी मन्दिर तिरुपति हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है , और भक्तों का मानना है कि देवी पद्मावती से प्रार्थना करने से उन्हें आशीर्वाद , समृद्धि और खुशी मिल सकती है। श्री पद्मावती अम्मावरी मन्दिर अपनी दैनिक आरती , भक्तों को प्रसाद की वितरण व्यवस्था एवं मनाए जाने वाले

त्योहारों के लिए भी जाना जाता है।

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