शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय स्टेट बैंक के प्रशासनिक कार्यालय कानपुर द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव की पृष्ठभूमि में 75 वर्ष की उम्र से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में समागत शिक्षकों को शॉल और सम्मान चिह्न देकर सम्मानित करते हुए श्री नीलेश द्विवेदी, उप महाप्रबंधक, एसबीआई ने कहा कि आज हम जो कुछ भी हैं उसमें शिक्षकों की महती भूमिका है। शिक्षक न केवल विद्यार्थी के व्यक्तित्व का निर्माता, बल्कि राष्ट्र का निर्माता भी होता है। अनादिकाल से शिक्षक की महत्ता का गुणगान उसके द्वारा प्रदत्त ज्ञान के कारण ही होता आया है। तभी तो कबीर कहते हैं, “गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काको लागूं पायं। बलिहारी गुरु आपने जिन गोविन्द दियो बताय।” पुरातन काल में ज्ञानी गुरुओं के बल पर ही हमारे राष्ट्र को जगद्गुरु बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शिक्षक की भूमिका केवल छात्रों को पढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को पढ़ाई के अलावा उन्हें सामाजिक जीवन से सम्बन्धित दायित्वों का बोध कराना तथा उन्हें समाज के निर्माण के योग्य बनाना भी शिक्षक का ही दायित्व है। श्री द्विवेदी ने आगे कहा कि जिस तरह आप गुरुजन समाज और राष्ट्र की इच्छाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करने के महती दायित्व को निभाते आए हैं, उसके लिए हम आपका अभिवादन और अभिनंदन करते हुए आपको यह पूर्ण विश्वास दिलाते हैं कि भारतीय स्टेट बैंक आपकी हर बैंकिंग आवश्यकता की पूर्ति के लिए सबसे आगे, और सबसे पहले खड़ा मिलेगा। इस अवसर पर उपस्थित गुरुजनों में से सीएसए कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त श्री उदित नारायण एवं श्री विंध्याचल सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए एवं गुरु की महत्ता पर स्वरचित कविता सुनाई। इस कार्यक्रम में श्री जेपी यादव, श्री केएच गुप्ता, श्री शशांक कुमार, श्री आरएस त्रिपाठी, श्री शिरीष भारती सहित बैंक के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन श्री आशीष त्रिपाठी, मुख्य प्रबंधक (एचआर) ने किया।
2021-09-05
