कानपुर देहात: विचित्र बुखार से बालक की मौत, बालिका भर्ती

कानपुर देहात जिले में डेंगू व बुखार का प्रकोप बढ़ रहा है। वहीं विचित्र बुखार ने भी दबे पांव दस्तक दी है। अचानक तेज बुखार के साथ झटके आने से शनिवार की रात एक बालक की मौत हो गई। उसे जिला अस्पताल से नाजुक हालत में कानपुर हैलट रेफर किया गया था। वहीं इसी प्रकार के लक्षणों से पीड़ित बालिका का जिला अस्पताल में उपचार किया जा रहा है।
राजपुर के शाहजहांपुर निवासी देवनारायण के छोटे पुत्र रजत (4) की शुक्रवार रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। तेज बुखार के साथ उसे झटके जैसे आने लगे। शनिवार सुबह परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए। हालत नाजुक देख चिकित्सकों ने उसे कानपुर हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। हैलट में वेंटीलेटर नहीं मिलने पर रात में देवनारायण पुत्र को निजी अस्पताल ले जा रहे थे तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई।

देवनारायण ने बताया कि शुक्रवार को पूरे दिन रजत ठीक रहा। रात में अचानक तेज बुखार आया और झटका आने लगा। सुबह बेटे को लेकर वह जिला अस्पताल पहुंचे। जहां से हालत गंभीर देख चिकित्सक ने हैलट रेफर कर दिया। वहां वेंटिलेटर नहीं मिलने पर उसे निजी अस्पताल ले जा रहे थे, रास्ते में बेटे की मौत हो गई।
वहीं पुखरायां के शिव मंदिर निवासी छुन्ना की पुत्री गुड़िया (4) को शुक्रवार को अचानक तेज बुखार आ गया। झटके आने पर परिजन उसे पुखरायां सीएचसी ले गए। वहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में डॉ. अमर चंद्रा ने गुड़िया को भर्ती कर इलाज शुरू किया।

फिलहाल उसकी हालत स्थिर बनी है। जिले में बुखार से पहले ही नौ लोगों की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल के डॉक्टर निशांत पाठक ने बताया कि हाई ग्रेड फीवर को ही विचित्र बुखार कहा जाता है। इसमें अचानक तेज बुखार, मरीज को झटके आने और उल्टी आदि की शिकायत होती है।

बुखार या फिर डेंगू का मरीज मिलने की जानकारी पर स्वास्थ्य टीमें मौके पर भेजी जाती हैं। दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है। जिले में कीटनाशक व मच्छर नाशक दवा का पर्याप्त स्टाक है। लोगों को भी घरों में कूलर, छतों पर रखे टायर या फिर फ्रीज के बाहर लगे पानी संग्रह पॉट में पानी नहीं भरा रहने देना चाहिए। भरे साफ पानी में डेंगू के लार्वा पनपते हैं। – डॉ. एपी वर्मा, डिप्टी सीएमओ/संक्रामक रोग नोडल अधिकारी।

हर रोज बढ़ रहे बुखार पीड़ित, आठ नये मरीज भर्ती

कानपुर देहात में बारिश के बाद जलजमाव होने व मच्छर पनपने से बुखार पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है। इधर सरकारी अस्पतालों में जांच के इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में ज्यादातर लोगों की सही जांच नहीं हो पा रही है। निजी लैब में जांच मरीजों की जेब पर भारी पड़ रही है। रविवार को ओपीडी बंद होने की वजह से इमरजेंसी में मरीज देखे गए। जिला अस्पताल में दो किशोरों समेत छह बुखार पीड़ित पहुंचे।

सभी को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया है। वहीं रसूलाबाद सीएचसी में बुखार पीड़ित आठ मरीज पहुंचे इनमें से दो मरीजों को भर्ती किया गया है। ईएमओ डॉ. सौरभ शाक्य ने बताया कि राना इटाहा गांव के मुकेश कुमार की पत्नी आरती व बेटा दिव्यांश तेज बुखार होने पर अस्पताल पहुंचे इनका इलाज किया गया है।
वहीं कबीर नगर निवासी राजेंद्र की बेटी शिवांगी (6) को 5 दिनों से बुखार आ रहा है जिसे डॉक्टर ने भर्ती कर लिया। सभानिवादा निवासी राम आसरे को भी कई दिन से बुखार आने पर भर्ती किया गया है। (संवाद)
नहीं कराई जा रही फॉगिंग
कुछ नगर पंचायतों को छोड़ दें तो अभी तक फॉगिंग की शुरुआत नहीं की गई है। इसकी वजह से मच्छर जनित बीमारी पैैर पसार रही है। जिले के दौरे पर आयी नोडल अधिकारी नीना शर्मा ने शनिवार को सीएचसी अकबरपुर के निरीक्षण के दौरान फॉगिंग नहीं कराने को लेकर नाराजगी जताई थी। जानकारों के अनुसार केवल सिकंदरा व अकबरपुर नगर पंचायत में फॉगिंग कराई जा रही है।

जबकि अन्य नगर निकायों में फॉगिंग की शुरुआत नहीं हो सकी है। संक्रामक रोग विभाग की ओर से भी फॉगिंग करने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। जबकि इस विभाग के पास फॉगिंग की पोर्टेबल मशीनें हैं l

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