*गणपतिजी का अद्भुत मन्दिर*

 

भारत को देवभूमि कहा जाता है , जिसका अर्थ है देवताओं की भूमि। विश्व में भारत देश खूबसूरत मन्दिरों का देश है।पुडुचेरी के मनाकुला विनायक मन्दिर में विराजित

गणपतिजी का मुख , सागर की तरफ है , जिनको भुवनेश्वर गणपति कहा गया है। इनका एक नाम मनाकुला विनायक भी है।

 

तमिल में मनल का अर्थ बालू और कुलन का अर्थ सरोवर होता है। पहले यहाँ स्थित गणेशजी की मूर्ति के आसपास बालू ही बालू थी , इसलिए लोग इन्हें मनाकुला विनायगर कहने लगे थे , जिसका अर्थ है ” रेतीले सरोवर के पास विराजित भगवान गणेश “। दक्षिण भारत न केवल अपने डोसा , सांबर , इडली और अन्य व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है , बल्कि अपने खूबसूरत प्राचीन मन्दिरों , वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है।

 

भारत के केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी को अक्सर पॉंडी या पुडुचेरी के नाम से जाना जाता है। पांडिचेरी अपने प्राचीन समुद्र तटों और फ्रांसीसी सड़कों और कैफे के लिए प्रसिद्ध है , लेकिन समुद्र तटों , सड़कों और कैफे के अलावा , समुद्र तट पर स्थित कई प्राचीन मन्दिर भी हैं।

 

पांडिचेरी में ऐसा ही एक मन्दिर अरुलमिगु मनाकुला विनयगर मन्दिर है। पांडिचेरी में स्थित इन मन्दिरों का इतिहास फ्रांसीसी

लोगों के आने से 500 साल पहले का है। मन्दिर का निर्माण व्हाइट टाउन या फ्रांसीसी क्वार्टर में किया गया था।

मन्दिर की एक कहानी 1688 में फ्रांसीसी शासन के समय की है , जब फ्रांसीसियों ने मन्दिर के पास में एक किला बनवाया था। उन्होंने विनयगर मूर्ति (भगवान गणेश की मूर्ति) को समुद्र में फेंककर यहाँ से हटाने का प्रयास किया , लेकिन हर बार जब उन्होंने ऐसा किया , तो मूर्ति चमत्कारिक रूप से फिर से इसी स्थान पर प्रकट हो गई।

 

आश्चर्यचकित होकर ,फ्रांसीसी लोगों ने गणेशजी को यहाँ से हटाने के अपने प्रयास छोड़ दिए और वे भी भगवान गणेश के समर्पित अनुयायी बन गए।

फांसीसियों ने कई बार इस मन्दिर की पूजा में व्यवधान डालने की भी

कोशिश की , लेकिन गणपतिजी का यह मन्दिर अपनी पूर्ण प्रतिष्ठा के साथ आज भी भक्तों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इस मन्दिर से जुड़ी एक और कहानी, जो करीब 300 साल पुरानी है, कहते है कि एक संत ने इस पवित्र स्थल पर समाधि ली थी। तब से , मन्दिर को नवजात शिशुओं के लिए एक शुभ स्थान माना जाता है।

 

मन्दिर की आन्तरिक सज्जा स्वर्ण जड़ित है। यहाँ मुख्य गणेश प्रतिमा के अलावा 58 तरह की गणेश मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। मन्दिर के अन्दर की दीवारों पर गणेशजी के जन्म , विवाह आदि के दृश्य चित्रित हैं। मन्दिर में गणेशजी का 10 फीट ऊँचा भव्य रथ कोडी कम्बम है। जिसके निर्माण में साढ़े सात कि.ग्रा. सोने का इस्तेमाल हुआ है। यह 18 फीट ऊॅंचा है।

 

मन्दिर में सोने के रथ पर बैठे भगवान गणेश की एक अद्भुत मूर्ति भी है। यह रथ पूरी तरह से सागौन की लकड़ी से बना और सोने से सजा यह रथ भक्तों के द्वारा दिये गये दान से बना है। और इसकी कीमत लगभग 75 लाख रुपये है।

मन्दिर की वास्तुकला की अपनी द्रविड़ शैली के लिए प्रसिद्ध , अरुलमिगु मनकुला विनयगर मन्दिर जटिल नक्काशी और राजसी गोपुरम के लिए जाना जाता है। मन्दिर परिसर पौराणिक कथाओं और दिव्य प्राणियों को दर्शाती जीवंत मूर्तियों से सुसज्जित है , जो आगंतुकों को अचम्भित करती है। यह मन्दिर 7913 वर्ग फीट के क्षेत्र में फैला हुआ है ।

 

मन्दिर के उत्कृष्ट वास्तुशिल्प डिजाइन में एक मंडपम , एक प्रहर और एक राजगोपुरम शामिल हैं , जहाँ विभिन्न देवी-देवता स्थापित हैं। भगवान गणेश के अलावा , आगंतुक मन्दिर परिसर में श्री कृष्ण , मुरुगन, शिव , पार्वती और कई अन्य महत्वपूर्ण देवी-देवताओं की मूर्तियाँ देख सकते हैं। विघ्नहर्ता भगवान गणेश से आशीर्वाद लेने के लिए भक्त अरुलमिगु मनाकुला विनयगर मन्दिर में आते हैं पूजा-अर्चना के अलावा, आगंतुक मन्दिर परिसर में विभिन्न गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। दैनिक अनुष्ठानों और समारोहों को देखना सांस्कृतिक अनुभव को बढ़ाता है। इसके अलावा , यहाँ लक्ष्मी नाम की एक हथिनी भी है , जो मन्दिर के बाहर खड़ी होकर बच्चों और बुजुर्गों दोनों को प्रसन्न करती रहती है और वह शाम 4 बजे से 8 बजे तक आशीर्वाद देती है।अरुलमिगु मनकुला विनयगर मन्दिर, यहाँ आने वाले सभी लोगों का दिल जीत लेता है। अरुल्मिगु मनाकुला विनयगर मन्दिर सुबह 5:30 से 11 बजे तक और शाम 4:30 से 9 बजे तक खुला रहता है।

कैसे पहुंचें पुडुचेरी के नए बस स्टैंड से मन्दिर की दूरी करीब चार कि.मी. है। पुडुचेरी का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन विल्लुपुरम है , जहाँ से मन्दिर करीब 35 कि.मी. दूर है। पुडुचेरी के लिए चेन्नई , तंजौर , त्रिच्चि , कोयंबटूर , बेंगलुरू , मदुरई से बसें भी चलती हैं। चेन्नई से यह करीब 135 कि.मी.दूर है। पांडिचेरी तक पहुँचने के लिये सबसे आसान तरीका सड़क मार्ग भी है , चाहे बस हो या टैक्सी। चेन्नई, मदुरै और बेंगलुरु से पांडिचेरी के लिए निजी पर्यटक बसें चलती हैं।

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