*जंहा सूर्यदेव भी भगवान शिव से अनुमति लेकर जग को उजागर करते हैं*
नीलकंठेश्वर मंदिर, उदयपुर(मध्य प्रदेश)
परमार राजा भोज के पुत्र उदयादित्य द्वारा 10-11 वीं शताब्दी में बनवाया गया उदयपुर का नीलकंठेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
यह मंदिर आस्था और शिल्प का बेजोड़ नमूना है। गगनचुम्बी शिखर, अद्धभुत शिल्प और गर्भगृह में विशाल शिवलिंग के दर्शन करने यहां श्रावण सोमवार पर लाखों दर्शनार्थी पहुंचते हैं।
मंदिर में प्रतिदिन सूर्य किरणाभिषेक होता है। सूरज की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर पड़ती है।
मंदिर का वास्तु कुछ इस प्रकार का है कि भोर की पहली किरण वेधशाला, मंडप और गर्भगृह के छोटे से द्वार को चीरती हुई भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर पड़ती है।
सूर्यदेव उदय के साथ ही भोलेनाथ को प्रणाम कर जग में उजियारा फैलाने की अनुमति मांगते हों। मुख्य शिवलिंग पर पीतल का आवरण चढ़ाया गया है। जिसे विशेष अवसर पर जल अर्पित करने और दर्शन के लिए अलग भी रख दिया जाता है। मंदिर मेंं शिवलिंग के पास ही देवी पार्वती की प्रतिमा भी उपस्थित है।
