यूपीएमआरसी ने मेडिकल कॉलेज और नगर निगम द्वारा किए गए दावों को खारिज कर दिया है। मेट्रो का कहना है कि नगर निगम ने जो 106 करोड़ की मांग की है वह वास्तविक नहीं बल्कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है। यह आंकड़ा आधारहीन है।
यूपी मेट्रो के डिप्टी जीएम जनसंपर्क पंचानन मिश्रा का कहना है कि यूपीएमआरसी द्वारा नगर निगम की जिन भी परिसंपत्तियों को स्थाई या अस्थाई रूप से उपयोग में लाया गया या उसका अधिग्रहण किया गया, उनके बदले निर्धारित प्रभार इससे काफी कम है. नियमानुसार निर्धारित हर प्रभाव के भुगतान के लिए यूपीएमआरसी तैयार है. सिर्फ मोतीझील के पास स्थित तुलसी उपवन का कुछ हिस्सा मेट्रो स्टेशन के निर्माण हेतु स्थाई रूप से लिया गया है और इस हिस्से के बदले जो भी भुगतान नियमानुसार देय होगा, यूपीएमआरसी उसका भुगतान करेगा. इसके अलावा जिन परिसंपत्तियों को यूपीएमआरसी द्वारा क्षतिग्रस्त किया गया, उन्हें या तो पुनः निर्मित करा दिया गया या फिर उसके सापेक्ष नगर निगम को विधिवत भुगतान पहले ही कर दिया गया है. वर्तमान में नगर निगम के साथ यूपीएमआरसी संयुक्त रूप से सर्वेक्षण करा रहा है और इसके बाद देनदारी का निर्धारण सरकारी नीतियों के अनुरूप होगा।
यूपी मेट्रो का कहना है कि नगर निगम का यह कहना गलत है कि बेनाझाबर के पास जिन मकानों को क्षतिग्रस्त किया था, उनका पुनः निर्माण बिना नींव के ही तैयार किया जा रहा है। यूपीएमआरसी द्वारा नींव को क्षतिग्रस्त ही नहीं किया गया था. इसे और बेहतर बनाया जा रहा था। जो मकान बने थे, उनके वैध-अवैध का निर्धारण यूपीएमआरसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है ।मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य संजय काला द्वारा लगाए गए आरोपों को बी यूपीएमआरसी ने बेबुनियाद बताया है ।कहा है कि कॉलेज परिसर में मेट्रो के ढांचे का कुछ हिस्सा आ रहा है और उसके निर्माण के लिए सिर्फ मेडिकल कॉलेज की बाउंड्री को तोड़ा गया था, जिसे दोबारा बनाकर दिया जा रहा है। यूपीएमआरसी पर अंडरपास और स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनाने की अतिरिक्त मांग की गई है, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था।
2021-09-09
