कानपुर

 

कानपुर के कानूनगो आलोक दुबे पर फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीनों में हेराफेरी करने के मामले में उन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए लेखपाल बना दिया गया। इतना ही नहीं अभी तक की जांच में उनके और पत्नी बच्चों के नाम से करीब 41 संपत्तियां सामने आ चुकी हैं। इस जमीनों की कीमत बाजार मूल्य के हिसाब से वर्तमान में करीब 30 करोड़ से अधिक की है।

 

लेखपाल के साथ मिलकर की जमीनों की खरीद फरोख्त

 

जमीन के हेराफेरी करने के मामले में आलोक दुबे के साथ लेखपाल अरुणा द्विवेदी भी कई जमीन पर हिस्सेदार बताई जा रही हैं। बताया जाता है कि दोनों ने मिलकर 2023 से लेकर 2025 तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई जगहों पर कुल 8.62 हेक्टेयर जमीन खरीदी हैं।

 

सचेंडी, बिठूर के आसपास के गांवों में ली जमीन

 

जिला प्रशासन की जांच में सामने आया कि अधिकतर आलोक दुबे ने जो जमीन ली है वो सचेंडी और बिठूर के आसपास के गांवों में ली हैं। ये जमीन आलोक की पत्नी संगीता और दोनों बेटों के नाम पर है। वहीं, दो जमीनऐसी भी है जिसमें लेखपाल अरुणा द्विवेदी भी जमीन में हिस्सेदार हैं।

 

2016 से 2023 तक बना ली करोड़ों की संपत्ति

 

आलोक दुबे ने 2016 से लेकर 2023 तक करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली। आलोक दुबे की सबसे ज्यादा संपत्ति दूल गांव में हैं। 2016 में आलोक ने अपने बेटे के नाम दूल गांव में ही 2 माह के अंदर 3 जमीनों का बैनामा कराया हैं।

 

इसके बाद सबसे ज्यादा जमीनों का जो बैनामा हुआ है वो 2023 में हुआ हैं। आलोक ने मई 2023 में 4 जमीनों का बैनामा कराया। इसके बाद इसके बाद उसी साल अगस्त में एक जमीन, सितंबर में दो जमीन, अक्टूबर में एक जमीन, नवंबर में 3 जमीन और दिसंबर में एक जमीन का बैनामा हुआ हैं।

 

इसमें से अगस्त में हुए एक बैनामे में लेखपाल अरुणा द्विवेदी भी पार्टनर हैं।

 

2024 में 4 जमीनें बेची तो 5 खरीदी

 

इसके बाद 2024 में आलोक दुबे ने अपनी 4 जमीनें बेची भी हैं। एक साल के अंदर ही 5 जमीनें भी खरीदीं।इसके बाद 2024 में आलोक दुबे ने अपनी 4 जमीनें बेची भी हैं। एक साल के अंदर ही 5 जमीनें भी खरीदीं। मार्च माह में 0.3070 हेक्टेयर की एक जमीन पर अरुणा द्विवेदी भी बैनामा में शामिल हैं। आलोक ने जनवरी में 49600 हेक्टेयर, मार्च में 3070, अप्रैल में 2490, जून में 2490, अक्टूबर में 1483 हेक्टेयर जमीन का अपने नाम से बैनामा कराया है।

 

पूर्व कानूनगो ने बोलने से इंकार किया

 

इस मामले में पूर्व कानूनगो आलोक दुबे से बात की तो उन्होंने बोलने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने जो कार्रवाई की है उसे मैं स्वीकार करता हूं और मुझे इस पर कुछ भी नहीं कहना हैं।

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