कानपुर समेत कई शहरों में 35 घंटे बारिश, 15 साल का टूटा रिकॉर्ड, मौसम विभाग ने की ये भविष्यवाणी
Fri, 17 Sep 2021
चक्रवाती हवाओं की चाल ने कानपुर परिक्षेत्र समेत पूरे प्रदेश को बारिश से सराबोर कर दिया। बुधवार दोपहर से लेकर गुरुवार रात तक कभी रिमझिम तो कभी मूसलाधार बारिश होती रही। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थित मौसम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक एक दिन में (16 सितंबर को) कानपुर परिक्षेत्र में 15 साल बाद इतनी बारिश (90 मिमी) हुई है।
इससे पहले 2005 में 69.4 मिमी बारिश हुई थी। शुक्रवार को भी ऐसी ही झमाझम बारिश के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी में एक और निम्न दबाव के संकेत मिल रहे हैं। यह बारिश रुकने के कुछ दिनों बाद फिर इसी तरह झोंका आ सकता है।
सीएसए के मौसम विभाग के प्रभारी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में जो निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ था, वह अब खिसक कर मध्य यूपी पर आ गया है। इसके साथ ही बादलों की शृंखला राजस्थान से लेकर यूपी के ऊपर होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है।
इससे चक्रवात का क्षेत्र बन गया और दक्षिणी-पश्चिमी हवाओं ने गति पकड़ ली। बादल बरसते हुए क्षेत्र में आकर ठहर गए। रात नौ बजे तक 90 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है।
इस मानसून सत्र में 751.8 मिमी बारिश
सीएसए के मौसम विभाग के तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि इस मानसून सत्र में 751.8 मिमी बारिश हुई है। पिछले साल यह 959.8 मिमी थी। मौसम विभाग प्रभारी डॉ. पांडेय ने बताया कि अरब सागर और बंगाल खाड़ी से हवाएं भरपूर नमी लेकर आई हैं। बंगाल की खाड़ी में एक और निम्न दबाव का क्षेत्र बन रहा है। मौजूदा दबाव का क्षेत्र एक-दो दिन रहेगा। इसके बाद अगले निम्न दबाव के प्रभाव से फिर बारिश की संभावना है।
इस मानसून सत्र में सर्वाधिक बारिश 108.6 मिमी
पूरे मानसून सत्र में अभी तक एक दिन में सर्वाधिक बारिश 28 जुलाई को हुई है। इस दिन 108.6 मिमी बारिश रिकार्ड की गई थी। मौसम विभाग का अंदाजा है कि अगर इसी तरह रात में भी बारिश हुई तो यह आंकड़ा 110 मिमी तक पहुंच सकता है।
सब्जियों की फसलों को नुकसान
लगातार हो रही बारिश से सब्जियों को नुकसान हो सकता है। इस वक्त किसान तरोई, खीरा, लौकी, कद्दू, कुम्हड़ा, भिंडी, बैगन, शिमला मिर्च की फसल बोए है। जो सब्जी तैयार हो गई है, उसको नुकसान हो सकता है। इसके अलावा टमाटर की नर्सरी को क्षति पहुंच सकती है। पौधे बह जाएंगे और सड़ सकते हैं। खेतों में मूंग, उड़द, तिल, मक्का, तोरिया आदि की फसलें लगी हुई हैं।
