गुरूद्वारा के स्त्री सतसंग की बहनो द्वारा श्री चौपई साहिब के पास शबद गायन किये गये।
आज गुरुद्वारा बाबा नामदेव मे श्री गुरूतेग बहादुर व मतीदास, सतीदास, दयाला की शताब्दी शहीदी को समर्पित गुरुमत समागम श्री गुरू गोविन्द जी के गुरूता गद्दी के 350 साला शताब्दी पर्व को मनाते हुए शाम के दीवान मे कानपुर के विभन्न गुरूद्वारा के स्त्री सतसंग की बहनो द्वारा श्री चौपई साहिब के पास शबद गायन किये गये।
द्वारा कीर्तन विशेष रूप से अमृतसर से आये दरबार साहिब के रागी भाई गुरूमेल सिंह जथे
रामु सिमरि रामु सिमरि इर्ह तेरै काजि है।। प्रीतम जानि लेहु मन माही अपने सुख सिउ ही जगु फांधिओ।। को काहू को नाहीं ।।1।। रहाउ।। इह जु दुनीया सिहरू मेला-दसतगिरी नाहि।तखतृ बहै तखतै दै लाइकि ने बताया श्री गुरुतेग बहादुर जी द्वारा आज से 350 साल शहादत से पहले श्री गुरूनानक देव जी की गद्दी का वारिश श्री गुरु गोविन्द सिंह जी स्थापित कर दिया था। गुरुमत समागम मे आये हुए स्त्री सतसंगो का सम्मान किया गया व गुरू की शहादत को समर्पित आने वाले दिनो मे गुरूमत समागमो से प्रेरणा लेकर गुरु के सिद्धान्तो पर चलने का प्रण कराया गया। सिख पंजाबी वेल फेयर सोसाईटी, गुरुद्वारा बाबा नामदेव समिति, स्त्री सतसंग गुरुद्वारा बाबा नामदेव द्वारा आयी हुई संगतो का सम्मान धन्यवाद किया गया गुरु के अटूट लंगर वरताये गये।सेवा करने वाले अमरजीत सिंह पम्मी, गुरूदीप सहगल, परमजीत चंडोक. अशोक अरोड़ा, श्री चन्द्र अशरानी, बहन सुरिन्दर कौर, रविन्दर कौर नीना, बलजीत कौर,इत्यादि लोग मौजूद रहे।
