*बिग न्यूज अपडेट*

 

*करोड़ों रूपये के घोटाले में केस्को बाबू विजय त्रिपाठी दोषी घोषित*

 

*प्रारंभिक जाँच में केस्को बाबू विजय त्रिपाठी दोषी घोषित*

 

*नकली दस्तावेज बनाने, श्रम न्यायालय को गुमराह करने, हाईकोर्ट इलाहाबाद में झूठा हलफनामा देकर बाबू का पद हड़पने का दोषी पाया*

 

*केस्को ने दिया आरोप पत्र, अब विभागीय जाँच के लिए जाँच कमेटी घोषित*

 

*अनुराग कटियार अधीक्षण अभियंता टेस्ट केस्को बनाऐ गए विभागीय जाँच कमेटी के अध्यक्ष*

 

1947 आजादी के बाद कानपुर के इतिहास का सबसे बड़ा फ्राड उजागर हुआ जहाँ एक पिता पुत्र ने हाइकोर्ट इलाहाबाद, श्रम न्यायालय, यूपीपीसीएल और केस्को को गुमराह कर श्रमिक से बाबू पद हड़प लिया है

 

मामला यह है

 

वर्ष 1990 में केस्को में विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 त्रिपाठी की भर्ती श्रमिक पद पर होती है और वर्ष 1995 में विजय त्रिपाठी के पिता जाली दस्तावेज से श्रम न्यायालय में मुकदमा संख्या 208/1995 इस बात के लिए दाखिल करते हैं कि विजय त्रिपाठी से बाबू का काम लिया जा रहा है उसे बाबू पद व वेतनमान दिया जाए लेकिन जब श्रम न्यायालय ने विजय त्रिपाठी की शैक्षिक योग्यता पूछी तो विजय त्रिपाठी ने खुद को इंटरमीडिएट पास बताया लेकिन विजय त्रिपाठी वर्ष 1992 में ही बी0एन0डी से ग्रेजुएट हो चुका था

 

चूँकि विजय त्रिपाठी अगर अपना ग्रेजुएशन बताता तो उसे यह भी बताना पड़ता कि उसने बीएससी की पढ़ाई कब की ? या श्रमिक की नौकरी कब की ? या बाबू पद का काम कब किया ?

 

लिहाजा मुकदमा हारने के डर से दोनों फ्राड पिता पुत्र ने श्रम न्यायालय से ग्रेजुएशन की बात छुपा ली और झूठा शपथ-पत्र देकर केस जीत लिया

 

फिर केस्को हाईकोर्ट में श्रम न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील पर गया तो वर्ष 1998 में भी विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 त्रिपाठी ने खुद को इंटरमीडिएट बता शपथ-पत्र हाईकोर्ट इलाहाबाद में दिया लेकिन जब मामला शैक्षिक योग्यता का फँसा तो विजय त्रिपाठी ने हाइकोर्ट को यह हलफनामा दिया कि उसने बीएससी पास कर रखी है इसी शपथ-पत्र को आधार मानते हुए हाईकोर्ट इलाहाबाद ने अपना निर्णय विजय त्रिपाठी के पक्ष में सुनाकर उसे बाबू का पदनाम और वेतनमान देने का आदेश जारी कर दिया

 

30 वर्ष बाद केस्को महामंत्री ने जब पड़ताल की तो पता चला कि विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 त्रिपाठी ने वर्ष 1990 रोल नंबर 8966 वर्ष 1991 रोल नंबर 27963 वर्ष 1992 रोल नंबर 50373 बीएनडी कॉलेज से द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण किया है दोनों पिता पुत्र ने केस्को विभाग, श्रम विभाग, हाईकोर्ट को गुमराह कर बाबू का पद हड़प लिया

 

मामले में केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले की ओर से चेयरमैन यूपीपीसीएल आशीष कुमार गोयल से शिकायत की गई जिसके बाद केस्को प्रबंध निदेशक सैमुअल पॉल एन ने केस्को जाँच कमेटी घोषित की जाँच कमेटी अध्यक्ष पी0के0 सिंह अधीक्षण अभियंता तकनीकी व जाँच कमेटी सदस्य अंकित अग्रवाल लेखाधिकारी केस्को ने प्रारंभिक जाँच में विजय त्रिपाठी को दोषी घोषित कर रिपोर्ट केस्को एमडी सैमुअल पॉल एन को सौप दी थी जिसके बाद विजय त्रिपाठी को आरोप पत्र केस्को प्रबंध ने जारी किया है

 

मामले में केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले ने कहा कि 30 वर्ष बाद दोनों पिता पुत्र का महाफ्राड पकड़ा गया है।

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