बकाया भुगतान को लेकर आशा कर्मियों का प्रदर्शन जारी, अब अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान

 

कानपुर में उत्तर प्रदेश आशा ट्रेड यूनियन के बैनर तले आशा बहुओं का प्रदर्शन उग्र हो गया है। कई महीनों से लंबित प्रोत्साहन राशि, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और 21,000 रुपये न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर कर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अधिकारियों की बेरुखी से नाराज कार्यकर्ताओं ने 15 दिसंबर से पूरे प्रदेश में काम ठप करने (अनिश्चितकालीन हड़ताल) का एलान किया है।

आशा कर्मियों का अपनी मांगों को लेकर आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य भर की आशा और आशा संगिनी कर्मियों के बकाया प्रोत्साहन राशि और दूसरी मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश आशा ट्रेड यूनियन के बैनर तले कानपुर कचहरी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर गुरुवार से शुरू हुआ धरना आज भी जारी है। आंदोलनकारियों ने अब 15 दिसंबर से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी हड़ताल की भी चेतावनी दे दी है।आशाबहुओं का कहना है कि तीन दिन से जारी धरने के बावजूद भी उनसे मिलने कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं पहुंचा है। इससे उनके आक्रोश में और इजाफा हो रहा है। उनका आरोप है कि वे नवंबर से ही सीएससी, पीएससी, सीएमओ कार्यालय और एनएचएम समेत शासन के विभिन्न स्तरों पर लिखित शिकायतें कर रही हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

उत्तर प्रदेश आशावर्कर्स यूनियन ने संबंधित अधिकारियों को एक चेतावनी पत्र जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे 15 दिसंबर से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी हड़ताल पर चली जाएंगी। यूनियन का कहना है कि आशा कर्मियों को केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि कई महीनों से नहीं मिली है, जिससे उनके परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

आशाकर्मियों ने अपने चेतावनी पत्र में जिन प्रमुख मांगों को रखा है, उनमें वर्ष 2025 के कई महीनों के बकाया आधार प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान।

आशा कर्मियों को ‘मानद स्वयंसेवक’ की जगह सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

उनके लिए ईपीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू हों।

10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपये का जीवन बीमा सुनिश्चित किया जाए।

न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा कर्मियों का मानदेय 21,000 रुपये और आशा संगिनी का 28,000 रुपये किया जाए।

गोल्डन आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी बनाने के कार्य के लिए बिहार के समान प्रति कार्ड 15 रुपये की दर से भुगतान किया जाए।

कार्य के दौरान हुई दुर्घटनाओं में मारे गए आशा कर्मियों के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।

प्रदर्शन मेंशामिल आशा बहुओं ने बताया कि उन्हें अक्सर कई-कई तरह के कार्य एक साथ करने के लिए दबाव डाला जाता है, लेकिन पर्याप्त पारिश्रमिक न मिलने के कारण वे गहरे अवसाद में हैं। उनका कहना है कि सरकार आरोग्य भारत जैसे सपने को साकार करने के लिए उनके श्रम का उपयोग तो कर रही है, लेकिन उनके हक के लिए कोई ठोस नहीं कर रही।

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