*61 वा श्री राम कथा प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला कानपुर नगर*

 

कानपुर 21 दिसंबर नगर का 165 वर्ष प्राचीन दक्षिण भारतीय प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला में पूर्व वर्षों की भांति 61 वा श्री राम कथा भक्ति में वातावरण में प्रारंभ हुई श्री राम कथा शुरू होने से पूर्व व्यास पीठ का परंपरागत पूजन मंदिर अध्यक्ष मुकुल विजय नारायण तिवारी एवं प्रबंधक अभिनव नारायण तिवारी द्वारा पूजन किया गया इस वर्ष कथा प्रसंग कौशल्या/ जनक / दशरथ को लेकर कथा प्रारंभ करते हुए कथा व्यास पंडित उमाशंकर जी ने प्रारंभ के भौतिक वादी युग में कौशल्या में मां तत्व एवं सास जेठानी के विभिन्न स्वरूप का प्रसंग उठाते हुए कहा कि कौशल्या ने यदि सुख प्राप्त किया है तो जीवन में संघर्ष को भी स्वीकार कर पूरे परिवार को गरिमा को बनाने का पूरा सफल प्रयास किया है विगत 60 वर्ष से निरंतर एक ही परिवार एक ही स्थान पर आध्यात्मिक प्रवचन भगवान भक्त वत्सल की कृपा है कि एक सार्वजनिक खुले वातावरण में यह श्री राम कथा हमारे गुरु तुलसी पंडित रामकिंकर उपाध्याय द्वारा प्रारंभ करते हुए आज निरंतर चली आ रही है।

 

कथा में मानस मर्मस पद्‌म भूषण श्री रामकिंकर जी महाराज के परम प्रिय पट्ट शिष्य श्री उमा शंकर व्यास जी ने बताया कि मानस में परस्पर सौहार्द स्नेह तथा अपनत्व निरन्तर बढ़ता रहे इसके बडे सुन्दर संकेत दिये गये हैं। महाराज श्री दशरथ तथ राजर्षि जनक परस्पर समधी हैं। एक वर का पिता है तो दूसरा कन्या का, जब परस्पर मिलन होता है तब आप देखेंगे कि दोनों ही पक्ष एक दूसरे को सम्मान तथा स्नेह देते हैं।

 

बहुधा देखा यह जाता है कि समाज में सम्बन्ध होने के पश्चात परस्पर दोष दृष्टि ही रहती है क्योंकि व्यक्ति की जो मानसिकता है वह अत्यन्त ओछी है, उसे लगता है कि सामने वाले की प्रसंशा करने से तो यह बड़ा मान लिया जायेगा, हम छोटे हो जायेंगे। यद्यपि यह उसकी मूल हैं क्योंकि व्यक्ति के पास जो वस्तु अधिक होती है वही देता है। यदि स्वयं सीमित मात्रा है तो उसे बचाने की चेष्टा करता है। वस्तुतः हमारे पास बड़प्पन इतना कम है हमें भय लगता है कि यदि हमने दूसरे को दिया तो हमारे पास समाप्त हो जायेगा। इसलिए हम बड़प्पन नहीं दे पाते। और छुदृता का तो हमारे पास भण्डार है। इसलिए उसे बांटने में कोई संकोच नहीं ।

 

राजर्षि जनक महाराज श्री दशरथ के सामने हाथ जोड़‌कर प्रसंशा कर रहे हैं कि राजन आप से सम्बन्ध होने पर अब हम सब प्रकार से बड़े हो गये । यह आपका बडप्पन है यह बडप्पन हमें आपने प्रदान किया।

 

” सम्बन्ध राजन रावरे हम बड़े अब सब विधि भये ” हमें आप आप सर्वदा अपना सेवक के रूप में स्वीकार करें। यह हमारा परम सौभाग्य है।

 

यह श्री राम कथा 21 दिसंबर से 27 दिसंबर तक रात 8 बजे से 9:30 बजे निरंतर उक्त स्थान पर होती रहेगी।

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