आज दिनांक 23.12.2025 को सायं 04ः00 बजे महापौर श्रीमती प्रमिला पाण्डेय की अध्यक्षता में जल निगम द्वारा दक्षिण क्षेत्र के जोन-3, जोन-5 के अन्तर्गत वार्ड-7,9,21,34,45, 51,55,65,72,77,70,82,87 कुल 13 वार्डो में जल निगम द्वारा डाली जा रही सीवर लाइन के सम्बन्ध में आ रही समस्याओं के सम्बन्ध में पार्षदों, जल निगम, जलकल के साथ बैठक की गयी।
बैठक में उपस्थित मा0 पार्षदों द्वारा अवगत कराया गया कि हमारे क्षेत्रों में जो सीवर लाइनें डाली जा रही है, उसकी पार्षदों को जानकारी ही नही दी जाती हैं, हमे कोईं जानकारी उपलब्ध नहीं करायी जा रही है, कौन काम कर रहा है, कब तक कार्य होगा ? गलियों में 200 एमएम की सीवर लाइन डाल रहे है, जबकि पूर्व से की कानपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 200 से 250 एमएम की लाइन पड़ी हुई, इससे बड़ी लाइन पड़नी चाहिए, क्योकि आबादी अब बढ़ गयी है और क्योंकि ज्यादातर क्षेत्रों में सीवर और बरसात का पानी एक साथ जाता है। भविष्य में सीवर लाइनों पर दबाव पढे़गा और सीवर लाइनें ध्वस्त हो जायेंगी और जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। गलियों में जे0सी0बी0 से कार्य कराया जा रहा है, विकसित क्षेत्र की गलियों मे पूर्व सीवर लाइन के साथ, पानी की लाइन, मोबाइल की लाइन और गैस लाइन की पड़ी हुई है, जेसीबी से कार्य कारण लाइनें क्षतिग्रस्त होगीं जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। इसलिये मैनुअली कार्य कराया जाये और पुरानी लाइनों को न छेड़छाड़ करके नये स्थान पर लाइनें डाली जाये। क्षेत्र में कई नई सड़कों को खोद दिया गया है, जिससे नगर निगम के निविदादाताओं का भुगतान फंस गया है। नौरैयाखेड़ा, दबौली में घरेलु जल-मल नहर में जाता है, नौरैया खेड़ा में पहले कार्य शुरू कराया जायें। साथ ही अविकसित क्षेत्रों मे पहले कार्य कराया जाये, क्योंकि वहॉ आवश्यकता ज्यादा है। सीवर चेम्बर 30 मीटर पर बनाये जा रहे है, जिससे फण्टी इत्यादि से सफाई कराने में समस्या होगी। जलकल के पास इतनी गाड़ियॉ नहीं है कि रोज गाड़ी आयेगी। पुराने क्षतिग्रस्त सम्पवेल के स्थान पर नये सम्पवेल बनवाये जाये।
बैठक में मा0 महापौर ने सीवर लाइन डाले जाने की निविदादाता फर्म एलसी इन्फ्रा के जीएम पंकज गज्जर एवं जल निगम अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि क्षेत्र में जब काम करें, तो पार्षदों के संज्ञान में लाकर करें। मैं शहर में विकास के लिये बैठी हूॅ, पार्षद आपके कार्य से संतुष्ट नही है। शहर 13 वार्डो जो विकसित है, वहॉ पर पुरानी लाइन को न तो छुए ना ही क्षतिग्रस्त करें, उसके स्थान पर नये स्थान पर लाइन डालें, ताकि जनता को परेशानी न हो। किस वार्ड में कहॉ-कहॉ का कार्य करना है, इसका नक्शा पार्षदों को उपलब्ध कराया जाये। बिना बतायें कोई सड़क न खोदी जाये। किस वार्ड में कब से कब तक कार्य करेंगे ? इसकी सूचना नगर निगम के मुख्य अभियन्ता ‘‘सिविल’’ सैय्यद फरीद अख्तर जैदी को उपलब्ध करायें, क्यों कि नगर निगम को कई क्षेत्रों में 15 वें वित्त एवं नगर निगम निधि से सड़के बनवानी है, सड़के बनने के बाद क्षतिग्रस्त होंगे, तो जनता एवं नगर निगम दोनों को परेशानी होगी। जेएनयूआरएम के अन्तर्गत जलनिगम द्वारा कराये गये कार्यो के कारण अब तक जनता परेशानी झेल रही है। जलनिगम द्वारा डाली गयी पानी की लाइनों के बार-बार क्षतिग्रस्त होने के कारण लाहे की पाइप लाइन मेरे द्वारा 15 वें वित्त आयोग के धन से डलवायी जा रही है। कार्य ऐसा करें कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी एवं मुख्यमंत्री योगी जी जो 2047 में विकसित भारत की योजना है वह साकार हो सके।
महाप्रबन्धक जल कल आनन्द कुमार त्रिपाठी ने कहा कि जलनिगम की डीपीआर में सीवर लाइन की साइज से सहमत नही है, क्योंकि कानपुर विकास प्राधिकरण ने जब आवासीय योजना लायी,तो उन्होने भी मानक के हिसाब से कार्य किया होगा। जो सीवर लाइन की साइज होनी चाहिए वह भविष्य में 30 साल के हिसाब से होना चाहिए। रतनलाल नगर में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन रही है, वह 200 एमएम डाया का सीवर लाइन वहॉ नहीं चल पायेगा।
मुख्य अभियन्ता ‘‘सिविल’’ सैय्यद फरीद अख्तर जैदी ने कहा जल निगम को बिना अनुमति सड़क खोदने हेतु मैने नोटिस दिया है, नोटिस का आज तक जवाब भी नहीं दिया गया। बिना आज्ञा सड़के खोद दी गयी है। कई नई सड़कों जिन्हें एक सप्ताह पूर्व ही बनाया गया था, उसे भी खोद दिया गया है, जिससे निविदादाताओं का भुगतान फंस गया है। हर वार्ड में कार्य के साथ पार्षद, जल निगम एवं जलकल के अधिकारी का एक ग्रुप बनायें, ताकि जो समस्या है, उसका मौके पर निराकरण हो सके। कार्य वाले स्थानों पर बोर्ड लगाये, उसमें प्रारम्भ का समय और पूर्ण होने का समय अंकित करायें, ताकि नागरिकों को भी जानकारी हो सके। ज्यादातर कार्य सड़कों के बजाय फुटपाथ पर करें, क्योंकि सड़कों की कास्ट ज्यादा होती है और जनता को सड़क खोदने से परेशानी होती है। जब तक नगर निगम परमिशन न दें, तब तक कार्य प्रारम्भ न कराये।
बैठक में महापौर जी के निर्देश के क्रम में अधीक्षण अभियन्ता जल निगम राजेन्द्र सिंह ने अवगत कराया कि दक्षिण क्षेत्र में रू0 414 करोड़ की लागत से 440 किमी0 सीवर लाइन डाली जानी है, जिसमें 324 किमी0 200 एमएम, 64 किमी0 250एमएम, 11किमी0 300एमएम एवं एसटीपी से कनेक्शन हेतु 1800एमएम की सीवर लाइन पड़नी है। इसमें जो 324 किमी0 की साइज बदलने का प्रकरण आया है, उसे तकनीकि प्रक्रिया से सर्वे कराकर कराया जायेगा। इस सीवर लाइन से 43760 सीवर कनेक्शन होंगे, इससे लगभग 50 हजार जनता लाभान्वित होंगे। इसे जल निगम (नगरीय) द्वारा कराया जा रहा है। इसमें गुजरात की कम्पनी को निविदा प्राप्त हुई है। जिन क्षेत्रों मे पहले से सीवर लाइनें पड़ी है, 200 एमएम या 400 एमएम की वो नाले में मिली हुई है। अभी तक 20 किलोमीटर लाइन डाली जा चुकी है। जो डीपीआर बनी है, वह आईआईटी से जॉच होने के बाद स्वीकृत हुई है। जो डाया स्वीकृत हुआ है। वह गाइड लाइन के हिसाब से है। जो क्षतिग्रस्त एसपीएस (सीवेज पम्पिंग स्टेशन) है, वह हमारी योजना का हिस्सा है, कई नये एसपीएस भी इस योजना में बनने है। महापौर जी को जो निर्देश है एवं पार्षदों जो समस्या है, उसके अनुसार कार्य कराया जायेगा।
बैठक में पार्षद डॉ0 अखिलेश वाजपेयी, सुधीर यादव, अलिल यादव, सतीश यादव, धीरेन्द्र कुमार सोनकर, योगेन्द्र शर्मा, सन्तोष साहू, अधिशाषी अभियन्ता ‘‘जलनिगम’’ तूलिका प्रसाद, प्राजेक्ट एलसी इन्फ्रा हेड शैलेश कुमार सिंह एवं जलनिगम, जलकल के अवर अभियन्ता इत्यादि भी उपस्थित रहे।
