कानपुर; दिनांक – 30.12.2025

“बिना छत मेट्रो ने मंगा ली ट्रेनें, अब खुले में खड़ीं” के संदर्भ में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि निर्माणाधीन कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-2 डिपो में नई ट्रेनों को बिना छत के उतारने को लेकर लगाए जा रहे आरोप भ्रामक एवं तथ्यहीन हैं। विश्वभर की मेट्रो रेल परियोजनाओं में यह एक सामान्य, स्वीकृत और मानक प्रक्रिया है कि ट्रेनों को प्रारंभिक चरण में खुले डिपो अथवा यार्ड में ही अनलोड, स्टेबल एवं शंट किया जाता है। दिल्ली मेट्रो, लखनऊ मेट्रो, नागपुर मेट्रो सहित लंदन अंडरग्राउंड तथा पेरिस मेट्रो जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों में भी ट्रेनों की डिलीवरी एवं प्रारंभिक स्टेबलिंग खुले यार्ड/डिपो में ही की जाती रही है। वर्तमान में कानपुर मेट्रो की नई आई ट्रेनों को कवर (रैपिंग) में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

 

यह भी उल्लेखनीय है कि कॉरिडोर-1 की पहली मेट्रो ट्रेन का आगमन टेंडर एवं डिजाइन के प्रारंभिक चरणों से गुजरने के बाद हुआ था, जबकि कॉरिडोर-2 की पहली ट्रेन के आगमन से पूर्व उसी डिजाइन की 29 ट्रेनें पहले ही कॉरिडोर-1 के लिए निर्मित होकर डिलीवर की जा चुकी हैं। ऐसे में ट्रेनों की डिलीवरी का यह क्रम किसी भी तरह असामान्य नहीं है तथा प्रारंभिक अनलोडिंग एवं स्टेबलिंग से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह मानक अनुरूप हैं।

 

डिपो में छतयुक्त वर्कशॉप की आवश्यकता मुख्य रूप से ट्रेनों की विस्तृत टेस्टिंग प्रक्रिया तथा नियमित रखरखाव प्रारंभ होने के समय होती है। इसी क्रम में वर्कशॉप हेतु प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग (PEB) संरचना का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसकी जानकारी पूर्व में भी सार्वजनिक रूप से साझा की जा चुकी है।

 

डिपो में वर्तमान में आ रही ट्रेनों की अनलोडिंग, शंटिंग एवं स्टेबलिंग के लिए आवश्यक ट्रैक पहले से तैयार हैं तथा सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप, चरणबद्ध एवं योजनाबद्ध ढंग से किए जा रहे हैं। कानपुर मेट्रो परियोजना शहर के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, अतः इससे संबंधित सार्वजनिक विमर्श तथ्यों पर आधारित, जिम्मेदार एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ किया जाना अपेक्षित है।

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